500 महार (बहुजन) सैनिकों के जीत के याद में 208वाॅ शौर्य दिवस मनाया गया।
एम ए न्यूज डेस्क नीरज कुमार के रिपोर्ट पटना से

बिहारशरीफः- बिहारशरीफ के अस्पताल चौक पर अतिपिछड़ा/ दलित/ अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा एवं फुटपाथ संघर्ष मोर्चा के तत्वाधान में 500 महार (बहुजन) सैनिकों द्वारा पेशवा की 28000 सैनिकों की हार के याद में शौर्य दिवस आयोजित किया गया। इस मौके पर शौर्य स्तंभ के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित करते हुए शौर्य दिवस मनाया गया।

इस अवसर पर अतिपिछड़ा/दलित/ अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं फुटपाथ संघर्ष मोर्चा के जिला अध्यक्ष रामदेव चौधरी ने कहा कि भीमा कोरेगांव में हर साल शौर्य दिवस समारोह आयोजित किया जाता है, जो1जनवरी 1818 को लड़े गए कोरेगांव के युद्ध की याद में मनाया जाता है, जिसमें 500 महार( बहुजन) सैनिकों सहित ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के 834 सैनिकों ने पेशवा की 28000 सैनिकों की सेना को हराया था। इस युद्ध में इसी दिन पुणे के पास भीमा-कोरेगांव में अंग्रेजों की ओर से लड़ रहे हैं 22 महार सैनिक शहीद हुए थे,जिसके कारण ब्राह्मण पेशवाओं की हार हुई थी। जहां ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की बॉम्बे नेटिव लाइट और इन्फैक्ट्री ने पेशवा बाजीराव द्वितीय की बड़ी मराठा सेना को हराया था। यह युद्ध दलितों के लिए आत्म- सम्मान और उत्पीड़न के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक था। उस समय दलित माने जाने वाले महार समुदाय के सैनिकों ने पेशवा की सैनिक के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी और अंग्रेजों की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस लड़ाई ने मराठा शक्ति को कमजोर किया और भारत में ब्रिटिश प्रभुत्व को बढ़ाया लेकिन दलित समुदाय के लिए यह जातिगत भेदभाव के खिलाफ एक शक्तिशाली प्रतीक बन गई। युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की याद में ब्रिटिश सरकार ने भीमा नदी के किनारे एक विजय स्तंभ बनवाया, जिस पर कंपनी के शहीद सैनिकों के नाम लिखे हैं। यह स्थान अब दलित गौरव आत्म- सम्मान और सामाजिक न्याय के संघर्ष का प्रतीक है। हर साल 1 जनवरी को हजारों लोग यहां श्रद्धांजलि देने आते हैं। डॉ बी आर अंबेडकर ने भी इस स्थान का दौरा किया और इसे सामाजिक संघर्ष के प्रतीक के रूप में देखा।
भीमा कोरेगांव का इतिहास सिर्फ एक युद्ध नहीं बल्कि ब्रिटिश भारत के दौरान दलितों के शौर्य आत्म- सम्मान और सामाजिक न्याय के संघर्षों का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
इस मौके पर अतिपिछड़ा/ दलित/ अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा के जिला महासचिव उमेश पंडित, जिला कमेटी सदस्य सुरेंद्र शर्मा फुटपाथ संघर्ष मोर्चा के जिला महासचिव महेंद्र प्रसाद उपाध्यक्ष सोना देवी बेबी देवी वीरू कुमार राजकुमार राम पिंकू साव अवधेश साव जयप्रकाश सोनू कुमार चंदन पासवान करमचंद गांधी किशोरी गोस्वामी शैलेंद्र कुमार राजेंद्र रावत राजकुमार भजनलाल सूरज कुमार पिकु कुमार रिंटू कुमार दुलारी देवी आदि लोग उपस्थित थे।
रामदेव चौधरी
अतिपिछड़ा /दलित/अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष


