
पटना (एम ए न्यूज डेस्क ) बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की आहट के साथ ही सूबे की सियासत में हलचल तेज हो गई है. सभी राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर चुनावी मैदान में मजबूती से उतरने की तैयारी में जुटे हैं. एनडीए ने इस बार भी नीतीश कुमार के नाम पर सहमति जताई है. पिछले चुनाव में तीसरे नंबर की पार्टी जेडीयू 2025 में फिर से नंबर बनने के लिए रणनीति पर मंथन कर रही है. ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व को ‘बिहार के विकास का स्वर्णिम युग’ बताकर जनता के बीच उतारने की तैयारी है.

2005 के बाद बदलता बिहार
जेडीयू ने 2005 से लेकर 2025 तक के नीतीश कुमार के कार्यकाल की योजनाओं, विकास कार्यों और नीतिगत बदलावों को एक किताब के रूप में संकलित किया है, जिसका शीर्षक रखा है ‘2005 के बाद बदलता बिहार’. इस बुकलेट को पंचायत स्तर तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया है, ताकि ग्रामीण स्तर पर नीतीश कुमार के कार्यकाल की तुलना पहले की सरकारों से की जा सके.

बुकलेट में काम का जिक्र
जनता दल की ओर से तैयार किए गए 2005 के बाद बदलते बिहार बुकलेट में मुख्यमंत्री के छह संदेश से शुरुआत की गई है. जिसमें नीतीश कुमार के विकास के विजन के बारे में बताया गया है. इसमें राजनीति सेवा के लिए है मेवा के लिए नहीं’, ‘मैं काम करता हूं मेरा काम ही बोलता है’, ‘न्याय के साथ विकास यानी हर क्षेत्र और हर तबके का विकास आधे मन से कोई काम बड़ा नहीं होता मैं वोट की नहीं वोटर की चिंता करता हूं’ और ‘बिहार को मैं उसे ऊंचाई तक ले जाना चाहता हूं, जहां से चाह कर भी कोई नीचे ना ला सके’ संदेश लिखा है.

2005 से 2025 की उपलब्धि
जेडीयू ने सुशासन से लेकर जाति आधारित गणना तक का जिक्र इस पुस्तक में किया गया है. इसमें 2005 के बाद कानून व्यवस्था में सुधार, हिंदू मुस्लिम एकता को लेकर कब्रिस्तानों एवं हिंदू मंदिरों की घेराबंदी, स्कूली शिक्षा में सुधार, स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक सुधार, राज्यों में सड़कों की स्थिति बेहतरीन, राज्य में बिजली के क्षेत्र में बेहतरीन काम, महिला सशक्तिकरण पर जोर और महिलाओं को नौकरी एवं पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण की चर्चा की गई है.
वहीं, स्वयं सहायता समूह (जीविका) का गठन, समाज सुधार अभियान, न्याय के साथ विकास, अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा पिछड़े-अति पिछड़े वर्ग को मुख्यधारा में लाने का काम, जाति आधारित गणना, कृषि रोड मैप, आपदा प्रबंधन को लेकर विशेष काम, राज्य में महत्वपूर्ण भावनाओं का निर्माण, इको टूरिज्म का विकास, 2015 में सात निश्चय और 2020 में 7 निश्चय पार्ट-2, 50 लाख युवाओं को नौकरी एवं रोजगार और जल जीवन हरियाली मिशन का भी जिक्र किया गया है.

पुल और भवनों का भी विस्तार से जिक्र
नीतीश कुमार के कार्यकाल में बिहार में अनेक बड़े पुलों और राष्ट्रीय स्तर के स्मारकों और भावनाओं का निर्माण किया गया. ऐसे में इस पुस्तक में इसका जिक्र किया गया है. 2005 की तुलना में सड़कों की लंबाई 14468 किलोमीटर से बढ़कर 26081 किलोमीटर हो गई जो लगभग दुगनी है.

इन जगहों पर पुल का निर्माण
गंगा में तीन बड़े पुल का निर्माण किया गया है. भोजपुर में वीर कुंवर सिंह सेतु, पटना में जेपी सेतु, मुंगेर में श्री कृष्णा सिंह सेतु, कोसी नदी में तीन नए पुल का निर्माण, गंडक में चार नए पुल का निर्माण और सोन नदी में दो नए पुल का निर्माण हुआ है.

राष्ट्रीय स्तर के भवनों का निर्माण
पटना में सम्राट अशोक कन्वेंशन (ज्ञान भवन, बापू सभागार, सभ्यता द्वार), बिहार संग्रहालय, बापू टावर, सरदार पटेल भवन, अंजुमन इस्लामिया भवन, बोधगया में महाबोधि सांस्कृतिक केंद्र, राजगीर में अंतरराष्ट्रीय खेल अकादमी, पटना में एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी और वैशाली में बुद्ध दर्शन संग्रहालय का भी निर्माण किया गया है.

पंचायत स्तर तक संदेश का लक्ष्य
जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार का कहना है कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद 2005 से अबतक ’20 साल बेमिसाल’ को लेकर यह बुकलेट छपवाया है. इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीति के छह संकल्प के साथ इसकी शुरुआत की गई है. उनका काम ही देश में नजीर पेश करता है. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के द्वारा किए गए काम को घर-घर तक पहुंचाने का काम जेडीयू के कार्यकर्ता करेंगे.
जो विपक्ष आज नीतीश कुमार के काम पर उंगली उठाता है, क्या वह बिहार में सड़क बनवा पाए थे घर-घर बिजली पहुंच पाए थे? अपने गांव तक में विद्यालय नहीं बनवा पाए थे. नीतीश कुमार के शासन का काम ही बोलता है. नीतीश कुमार के काम को देखते हुए ही जनता ने फिर से मन बना लिया है कि 2025 में फिर से नीतीश.

नीरज कुमार मुख्य प्रवक्ता जनता दल यूनाइटेड
पंचायत स्तर तक बेहतरीन काम
नीरज कुमार ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में जितना कम हुआ है, यदि उन सभी का जिक्र किया जाए तो पंचायत स्तर पर 200 पेज का बुकलेट तैयार हो सकता है लेकिन हमने केवल प्रमुख कार्यों को लेकर ही इसे तैयार करवाया है.

विपक्षी नेताओं को भी भेजा जाएगा बुकलेट
नीरज कुमार ने कहा कि इस बुकलेट को विपक्ष के सभी बड़े नेताओं को भी भेजा जाएगा. आरजेडी चीफ लालू यादव, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, सीपीआई माले महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, सीपीआई नेता राम नरेश पांडे और सीपीएम नेता अवधेश कुमार के अलावे अन्य विपक्षी विधायकों के पते पर भी इसे भेजा जाएगा.

तेजस्वी को बुकलेट पढ़ने की सलाह
जेडीयू प्रवक्ता ने तेजस्वी यादव को इस बुकलेट को पढ़ने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में जो काम किया गया है, उसका जिक्र इस पुस्तक में है. इसको पढ़कर नेता प्रतिपक्ष को सोशल मीडिया पर पोस्ट करना चाहिए. यदि किताब पढ़ने के बाद तेजस्वी ने अपना वक्तव्य नहीं दिया तो वह यह मान लेंगे कि उन्होंने नीतीश कुमार के विकास के काम को मान लिया है.

ग्लोबल लीडर हैं नीतीश कुमार
नीतीश सरकार की उपलब्धियों को अपनी नकल बताने पर नीरज कुमार ने तेजस्वी यादव को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार क्लाइमेट लीडर एवं ग्लोबल थिंकर हैं. हम लोग 420 के आदमी नहीं है. किसी का एजेंडा नहीं चुराते हैं. 125 यूनिट बिजली फ्री की बात हो या नौकरी और रोजगार का मसला हो, हमारी सरकार ने इसे करके दिखाया है.

जवाहरलाल नेहरू को किया याद
नीरज कुमार ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के द्वारा लिखी हुई किताब डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पंडित नेहरू ने अपनी किताब में लिखा था कि गंगा में जब 25 से 40 किलोमीटर की दूरी पर पुल का निर्माण होगा तो उस इलाके की तस्वीर बदल जाएगी. नीतीश कुमार ने वह भी करके दिखा दिया.

मुख्यमंत्री चेहरे पर सहमति
जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री पद की बिहार में कोई वैकेंसी नहीं है. नीतीश कुमार जिधर देखते हैं, वही खबर बन जाती है. बिहार में बिना नीतीश कुमार के सरकार नहीं हो सकती. इसीलिए जेडीयू ने नारा दिया है कि 25 से 30 फिक्स हैं नीतीश. गठबंधन के साथियों को भी नीतीश कुमार के चेहरे पर पूर्ण भरोसा है.

क्या कहते हैं जानकार?
वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय भी मानते हैं कि 20 वर्षों के नीतीश कुमार के शासनकाल में बिहार ने बहुत बदलाव देखा है. कानून व्यवस्था, सड़कों का जाल, बड़े पुल एवं पुलियों का निर्माण, बदहाल शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाना, स्वास्थ्य सेवा में भी व्यापक काम दिख रहा है. नीतीश कुमार की सबसे बड़ी उपलब्धि महिलाओं की शिक्षा एवं महिलाओं को पंचायत स्तर पर 50% आरक्षण बिहार में नौकरी में महिलाओं के लिए 30% आरक्षण सबसे बड़ी उपलब्धि है.
जदयू के द्वारा जो बुकलेट तैयार की गई है, वह गांव तक लोगों के बीच भेजकर नीतीश कुमार लोगों को यह बताने का प्रयास करेंगे कि इन 20 वर्षों में बिहार कहां से कहां पहुंच गया है. जिसका राजनीतिक लाभ आगामी विधानसभा चुनाव में जदयू एवं एनडीए गठबंधन को हो सकता है.


