
पटना ( एम ए न्यूज डेस्क ) विदेश में नौकरी दिलाने के बहाने म्यांमार में बंधक बनाए गए दानापुर निवासी इंजीनियर सचिन कुमार सिंह को पटना पुलिस की तत्परता और भारतीय दूतावास की मदद से सकुशल भारत वापस लाया गया है. यह मामला मानव तस्करी और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने इसे बेहद गंभीरता से लिया. वहीं इस मामले में साइबर पुलिस की भी मदद ली गई.

म्यांमार में बंधक बनाए गए इंजीनियर
26 जून 2025 को दानापुर थाना क्षेत्र के न्यू मैनपुरा, प्रगति नगर की रहने वाली मीना देवी ने अपने पुत्र सचिन कुमार सिंह (पिता उमाशंकर सिंह) के बंधक बनाए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में कहा गया था कि सचिन को विदेश में ऊंची तनख्वाह पर नौकरी दिलाने के नाम पर म्यांमार बुलाया गया और वहां बंधक बना लिया गया. आरोपियों में नेपाल के सरहली जिले के निवासी धर्मेन्द्र चौधरी और जितेन्द्र चौधरी, सीतामढ़ी जिले का सुनील कुमार और एक विदेशी कंपनी के एचआर के तौर पर सक्रिय SuLuo नामक शख्स को नामजद किया गया.

नामजद अभियुक्त गिरफ्तार
आवेदन के आधार पर दानापुर थाना कांड संख्या–665/25 दर्ज किया गया. इसमें भारतीय न्याय संहिता-2023 की कई गंभीर धाराएं लगाई गईं. नगर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी भानु प्रताप सिंह के निर्देशन में विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया. टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सीतामढ़ी से नामजद अभियुक्त सुनील कुमार को गिरफ्तार कर लिया. अनुसंधान में यह भी सामने आया कि सचिन को छुड़ाने के एवज में उसके भाई साहिल कुमार सिंह से डेढ़ लाख रुपये की फिरौती सुनील कुमार के बैंक खाते में जमा कराई गई थी.

भारतीय दूतावास से लगातार संपर्क
पटना वेस्ट एसपी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि हमने भारतीय दूतावास (म्यांमार) और विदेश मंत्रालय (पीएमओ) से लगातार संपर्क साधा. जुलाई महीने में दूतावास से सूचना मिली कि सचिन को म्यांमार की मिलिट्री ने साइबर स्कैम सेंटर से छुड़ाकर कैंप में सुरक्षित रखा है. इसके बाद निरंतर प्रयासों से 27 अगस्त 2025 को भारतीय दूतावास ने सचिन को दिल्ली भेज दिया, जहां से पटना पुलिस ने उन्हें सकुशल घर पहुंचाया. दिल्ली से लाने के बाद पटना पुलिस ने औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर उन्हें उनके परिजनों के हवाले कर दिया.
यह मामला संगठित अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़ा है. पुलिस अनुसंधान में यह साफ हुआ कि नेपाल और बिहार के एजेंट मिलकर युवाओं को विदेश में ऊंची नौकरी का झांसा देकर मानव तस्करी और साइबर अपराध के जाल में फंसा रहे हैं. सभी नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी. साथ ही विदेश मंत्रालय और दूतावास के सहयोग से बिहार के अन्य युवाओं की भी पहचान की जा रही है, जिन्हें इसी तरह ठगकर म्यांमार ले जाया गया हो सकता है
भानु प्रताप सिंह एसपी पटना वेस्ट
चालबाजों ने कैसे जाल में फंसाया?
पुलिस पूछताछ में सचिन ने बताया कि वह पेशे से कंप्यूटर साइंस इंजीनियर हैं. नेपाल निवासी एजेंट धर्मेन्द्र चौधरी ने उन्हें 12 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर विदेश में नौकरी दिलाने का लालच दिया. जब सचिन ने अपने पास केवल टूरिस्ट वीजा होने की बात कही तो एजेंट ने वर्क वीजा दिलाने का आश्वासन दिया. इसके बाद सचिन को पटना से कोलकाता और वहां से बैंकॉक ले जाया गया. करीब 12 घंटे की कार यात्रा के बाद उन्हें म्यांमार के मियाबड़ी इलाके में स्थित सहाय ग्रुप कंपनी ले जाया गया.

म्यांमार ले जाने के बाद वहां शुरू में तीन महीने तक सामान्य काम कराया गया लेकिन बाद में साइबर स्कैम सेंटर में बंधक बना लिया गया. पासपोर्ट और मोबाइल जब्त कर लिया गया. स्कैम का काम करने से इंकार करने पर इलेक्ट्रिक शॉक और मारपीट की जाती थी. तस्वीरें और वीडियो मेरे भाई को भेजकर लगातार पांच हजार डॉलर की फिरौती मांगी जाती थी. धमकी दी जाती थी कि पैसे नहीं मिलने पर उनके शरीर के अंग काटकर बेच दिए जाएंगे.
सचिन कुमार पीड़ित इंजीनियर


