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रेल पुलिस ने बच्चा चोर गैंग का किया पर्दाफाश, एक बच्चे की कीमत 2 लाख महिला भी शामिल

पटना (एम ए न्यूज डेस्क ) राजधानी पटना से गायब बच्चा मामले में रेल पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. रेल पुलिस की इस कार्रवाई में बच्चा चोरी गैंग के 3 महिला समेत 8 आरोपी को गिरफ्तार किया गया है. 6 माह के बच्चा को नालंदा से सकुशल बरामद कर लिया गया है.

23 अगस्त गायब हुआ था बच्चा

रेल डीआईजी राजीव मिश्रा ने बताया कि 23 अगस्त को पटना जंक्शन से छह माह का बच्चा गायब हो गया था. मां की सूचना पर जीआरपी ने मामले की जांच शुरू की. तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों के आधार पर छानबीन तेज की और संदिग्धों की गतिविधियों को ट्रैक किया. इसी दौरान इस गैंग के नेटवर्क का खुलासा हुआ.

पुलिस की मेहनत रंग लाई और मासूम को नालंदा के एकंगरसराय से सकुशल बरामद कर लिया गया. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस गैंग ने एक अन्य बच्चे को भी चुरा कर रखा था, जिसे भी पुलिस ने छुड़ा लिया.

राजीव मिश्रा डीआईजी रेल

मासूमों को बेचने का नेटवर्क

रेल डीआईजी ने बताया कि इस गैंग का नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है. गिरफ्तार आठ आरोपियों से पूछताछ जारी है. इनमें तीन महिलाएं शामिल हैं, जो पीड़ित महिलाओं का विश्वास जीतने और बच्चों को संभालने का काम करती थीं. एक आरोपी अभी भी फरार है. यह गिरोह मुख्य रूप से उन परिवारों से संपर्क करता था जिनके यहां बच्चे नहीं होते थे. डिमांड के आधार पर बच्चों की चोरी की जाती और फिर उन्हें दो से ढाई लाख रुपये में बेच दिया जाता.

ऐसे होता था सौदा

नालंदा के एकंगर सराय निवासी संजीत विश्वकर्मा ने मुन्ना बिंद से 2 लाख रुपये में एक बच्चे की डील की थी. इसके लिए मुन्ना बिंद ने रंजीत नामक आरोपी को बच्चे की चोरी करने के एवज में 60 हजार रुपये दिए. रंजीत ट्रेन से कोटा गया और वहां एक अकेली महिला से जान-पहचान बढ़ाई. धीरे-धीरे उसने उसका भरोसा जीता और पटना जंक्शन पहुंचने के बाद मौका पाकर बच्चा लेकर फरार हो गया.

सतर्कता से मासूम सुरक्षित

पुलिस की सतर्कता और तत्परता के चलते दोनों मासूम बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया गया है. रेल डीआईजी ने साफ कहा है कि गैंग के नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है. यह पता लगाया जा रहा है कि अब तक कितने बच्चों की तस्करी की गई है. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इनके संपर्क में और कौन लोग शामिल हैं.

आरोपियों से पूछताछ जारी

डीआईजी ने बताया कि गिरफ्तार आठों आरोपियों से पूछताछ जारी है. पुलिस का मानना है कि इस गैंग का नेटवर्क और बड़ा है. कई जगहों पर इनके सक्रिय रहने की आशंका है. अस्पताल और रेलवे स्टेशन पर बच्चों को निशाना बनाने का तरीका बताता है कि गैंग सुनियोजित तरीके से काम करता था.

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