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CBI–ED की ताबड़तोड़ कार्रवाई, भ्रष्टाचार, टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ एक्शन

एम ए न्यूज डेस्क: नीरज कुमार के रिपोर्ट पटना से

पटना: साल 2025 बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक इतिहास में एक ऐसे साल के रूप में दर्ज हुआ, जब भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी के मामलों में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक के बाद एक बड़े एक्शन लिए. इन कार्रवाइयों ने न सिर्फ ठेकेदारों और अफसरों को कटघरे में खड़ा किया, बल्कि सत्ताधारी और विपक्षी दलों से जुड़े कई प्रभावशाली चेहरों पर भी सवाल खड़े कर दिए.

छापों का सिलसिला

जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 तक बिहार के पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर सहित कई जिलों में केंद्रीय एजेंसियों ने छापेमारी की. जांच एजेंसियों की कार्रवाइयां फर्जी कंपनियां, बैंकिंग सिस्टम, सरकारी टेंडर और राजनीतिक संरक्षण की कड़ी साफ नजर आई.

CBI–ED की प्रमुख कार्रवाइयां

10 जनवरी 2025 को ED ने बिहार के 19 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा. कार्रवाई एक्सिस बैंक, ICICI बैंक और IDBI बैंक से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले को लेकर की गई. जांच में खुलासा हुआ कि करीब 183 फर्जी लोन खाते बनाए गए, जिनके जरिए बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग की गई.

आरजेडी नेता पर दबिश

21 मार्च 2025 को ED ने रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल (RCT) से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई की. पूर्व आरजेडी विधायक रामानंद सिंह, उनके बेटे कुमार ऋषि सिन्हा और अन्य सहयोगियों पर ₹8.02 करोड़ की अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप है. इस मामले में 24 संपत्तियां अटैच की गईं.

सरकारी टेंडर को लेकर कार्रवाई

13 जून 2025 को बिहार के पटना और मुजफ्फरपुर इसके अलावे सूरत में एक साथ छापेमारी हुई. ठेकेदार ऋषु रंजन सिन्हा उर्फ ऋषु श्री के ठिकानों से 11.64 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए. ईडी द्वारा की गई कार्रवाई इसलिए की गई कि यह रकम सरकारी टेंडर में गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी हुई थी.

GST रिफंड घोटाला का खुलासा

21 जून 2025 को CBI ने 100 करोड़ रुपये के GST रिफंड घोटाले का भंडाफोड़ किया. पटना, जमशेदपुर और झारखंड के कई इलाकों में छापे पड़े. फर्जी निर्यात बिल, बोगस कंपनियां और कस्टम अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई.

अफसर और संस्थान भी जांच के दायरे में

10 जुलाई 2025 को आर्थिक अपराध इकाई ने BSEIDC, पटना के कार्यपालक अभियंता प्रमोद कुमार के ठिकानों पर छापेमारी की. उन पर 300 प्रतिशत से अधिक आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप है. जांच में सामने आया कि फर्जी निर्यात दिखाकर बोगस कंपनियों के जरिए GST रिफंड लिया गया. इस खेल में कस्टम अधिकारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट और कारोबारी शामिल थे.

अफसर और संस्थान भी जांच के दायरे में

10 जुलाई 2025 को आर्थिक अपराध इकाई ने BSEIDC, पटना के कार्यपालक अभियंता प्रमोद कुमार के ठिकानों पर छापेमारी की. उन पर 300 प्रतिशत से अधिक आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप है. जांच में सामने आया कि फर्जी निर्यात दिखाकर बोगस कंपनियों के जरिए GST रिफंड लिया गया. इस खेल में कस्टम अधिकारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट और कारोबारी शामिल थे.

आय से अधिक संपत्ति के खिलाफ स्ट्राइक

10 जुलाई 2025 को आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने BSEIDC, पटना के कार्यपालक अभियंता प्रमोद कुमार के ठिकानों पर छापा मारा. जांच में खुलासा हुआ कि उनके पास 300 प्रतिशत से अधिक आय से अधिक संपत्ति है.सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, उनकी वैध आय इतनी नहीं थी कि वे इतनी संपत्ति बना सकें.

छात्रवृत्ति घोटाले को लेकर कार्रवाई

वहीं सितंबर 2025 में CBI ने SC/ST छात्रवृत्ति घोटाले को लेकर मुजफ्फरपुर और दरभंगा में छापे मारे. जांच में सरकारी फंड के दुरुपयोग और फर्जी संस्थानों के जरिए पैसे निकालने के सबूत मिले. जांच में सामने आया कि फर्जी शैक्षणिक संस्थानों के जरिए गरीब छात्रों के नाम पर करोड़ों रुपये निकाल लिए गए.

टेंडर के नाम पर अनियमितता

7 दिसंबर 2025 को ED ने बिहार टेंडर घोटाले में 9 करोड़ रुपये नकद जब्त किए. हालांकि जब्त की गई रकम के असली मालिक को लेकर अब भी जांच जारी है. वहीं, विशेष निगरानी इकाई (SVU) और कुछ पूर्व अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.

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