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नालंदा सिपाही हत्याकांड में नया मोड़! महिला दरोगा पुष्पा पर सिंडिकेट चलाने और करोड़ों की संपत्ति जुटाने के गंभीर आरोप

एम ए न्यूज डेस्क नीरज कुमार के रिपोर्ट।

**नालंदा/बिहार:** नालंदा में मद्यनिषेध विभाग के ईआईबी सिपाही अजीत कुमार हत्याकांड में नामजद महिला सब-इंस्पेक्टर पुष्पा कुमारी को लेकर चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। क्या खाकी की आड़ में अवैध वसूली का नेटवर्क चल रहा था? क्या शराब तस्करी से जुड़े कथित सिंडिकेट के जरिए करोड़ों की संपत्ति जुटाई गई? पूर्व सहयोगियों के दावों ने इस पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।

मीडिया रिपोर्टों में सामने आए दावों के मुताबिक, पुष्पा कुमारी राजगीर में करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से रिसॉर्ट बनाने की तैयारी में थी। नाम नहीं छापने की शर्त पर उसके पूर्व सहयोगियों ने आरोप लगाया है कि वह करीब 10 निजी लोगों की टीम के जरिए कथित तौर पर समानांतर छापेमारी नेटवर्क चलाती थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित एजेंसियों की जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

## शराब तस्करों से सांठगांठ और अवैध वसूली के आरोप

पूर्व सहयोगियों का दावा है कि इस कथित नेटवर्क में निजी हथियारों और राइफलों से लैस लोग शामिल थे, जो शराब कारोबारियों के ठिकानों पर कार्रवाई के दौरान फायरिंग तक करते थे। हिलसा में तैनाती के दौरान भी कई बार गोलीबारी किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। वहीं, अजीत कुमार पर हमले के दौरान चलती स्कॉर्पियो पर दोनों तरफ से कई राउंड गोलियां चलने की बात कही गई है।

आरोप यह भी है कि शराब लदे वाहनों को छोड़ने के बदले मोटी रकम वसूली जाती थी। एक कथित मामले में वाहन छोड़ने के एवज में 20 लाख रुपये तक लेने का दावा किया गया है। इसके अलावा, जब्त शराब की कथित तस्करी और शराब पीने के आरोप में पकड़े गए लोगों को छोड़ने के बदले उनके परिजनों से पैसे वसूलने की बात भी सामने आई है।

## 5 करोड़ के रिसॉर्ट से आय से अधिक संपत्ति तक उठे सवाल

इन दावों के बाद अब पुष्पा कुमारी की कथित संपत्ति और आय के स्रोतों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, रिसॉर्ट निर्माण, अवैध वसूली और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि सिपाही अजीत कुमार की हत्या के पीछे की पूरी साजिश क्या थी और क्या इस मामले के तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं? जांच एजेंसियों की पड़ताल में इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी है। फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों और जांच में प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।

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