
पटना ( एम ए न्यूज डेस्क ) बिहार में चौथे चरण की शिक्षक बहाली (TRE-4) को लेकर घमासान तेज हो गया है. शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान किया कि चौथे चरण की परीक्षा दिसंबर में 16 से 19 तारीख के बीच आयोजित की जाएगी. लेकिन यह घोषणा अभ्यर्थियों को रास नहीं आई. उनका कहना है कि यह सिर्फ चुनावी स्टंट है और सरकार युवाओं को बरगलाने का काम कर रही है. अभ्यर्थियों की स्पष्ट मांग है कि विधानसभा चुनाव से पहले ही चौथे चरण की परीक्षा कराई जाए, अन्यथा वे आगामी चुनाव में वोट बहिष्कार करेंगे.

अभ्यर्थियों में गुस्सा
लंबे समय से बहाली का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा युवाओं और छात्रों के हित की बात करते हैं. वे परीक्षा जल्द कराने की घोषणा भी कई बार कर चुके हैं, लेकिन उनके अधीनस्थ अधिकारी परीक्षा में लगातार देरी कर रहे हैं. अभ्यर्थियों का आरोप है कि अधिकारी जानबूझकर मुख्यमंत्री की छवि धूमिल कर रहे हैं. समय पर परीक्षा न होने से बेरोजगार युवाओं की परेशानी और बढ़ गई है और इसका सीधा असर उनकी तैयारियों और भविष्य पर पड़ रहा है.
डोमिसाइल नीति और वैकेंसी में भारी कटौती
छात्र नेता दिलीप का बड़ा आरोप डोमिसाइल नीति पर है. उनका कहना है कि जब डोमिसाइल लागू नहीं था, तब लाखों पदों पर बहाली की बात होती थी. कभी 50 हजार तो कभी 80 हजार और फिर 1.20 लाख पदों पर वैकेंसी का दावा किया गया. लेकिन जैसे ही डोमिसाइल लागू हुआ, सीटों में कटौती कर दी गई.
अब शिक्षा मंत्री महज 27,910 पदों की वैकेंसी की बात कर रहे हैं. अभ्यर्थियों को यह मंजूर नहीं है. वैकेंसी में कटौती से साफ है कि पहले बाहर के युवाओं को नौकरी देने के लिए आंकड़े बढ़ाए जाते थे, और अब बिहार के युवाओं के साथ छल किया जा रहा है.
दिलीप, छात्र नेता
मिलर हाई स्कूल के पास जोरदार प्रदर्शन
मंगलवार को बड़ी संख्या में शिक्षक अभ्यर्थियों ने पटना के मिलर हाई स्कूल के पास प्रदर्शन किया. छात्र नेता दिलीप के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन में अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुराने ट्वीट का कटआउट लेकर सरकार को घेरा. ट्वीट (X) में नीतीश कुमार ने लाखों पदों पर शिक्षक बहाली का वादा किया था. प्रदर्शनकारियों ने ऐलान किया कि 9 सितंबर को पटना की सड़कों पर बड़ा आंदोलन होगा. पटना कॉलेज से पैदल मार्च निकाला जाएगा जो बेली रोड तक जाएगा.
चुनाव से पहले हो TRE-4 परीक्षा
दिलीप ने कहा कि अप्रैल में ही यह परीक्षा हो जानी चाहिए थी, लेकिन जानबूझकर इसे टाल दिया गया. अब सरकार दिसंबर में परीक्षा कराने की बात कर रही है, जबकि तब तक चुनावी प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी. उन्होंने साफ कहा कि यदि सरकार चुनाव से पहले परीक्षा नहीं कराती है तो लाखों अभ्यर्थी वोट का बहिष्कार करेंगे.
मुख्यमंत्री खुद पांचवें चरण से पहले STET कराने की घोषणा कर चुके हैं और सितंबर में STET का फॉर्म भी निकलेगा. ऐसे में चौथे चरण को चुनाव से पहले करना पूरी तरह संभव है.
दिलीप, छात्र नेता
वैकेंसी पूरी निकले, नहीं तो आंदोलन होगा तेज
दिलीप ने कहा कि छात्रों की मांग है कि चौथे चरण में पूर्ण वैकेंसी निकाली जाए. मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बयानों के मुताबिक 1.20 लाख पदों पर बहाली होनी चाहिए. अगर सरकार महज 27 हजार पदों पर परीक्षा कराना चाहती है तो यह युवाओं के साथ धोखा है. अभ्यर्थी आधी-अधूरी वैकेंसी को स्वीकार नहीं करेंगे.
अभ्यर्थी शाहबाज आलम का बयान
प्रदर्शन में शामिल शिक्षक अभ्यर्थी शाहबाज आलम ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हमेशा छात्रों के हित में काम किया है, लेकिन मंत्री और विभागीय अधिकारी उनकी नहीं सुन रहे हैं. बार-बार 10-12 दिन का आश्वासन दिया गया लेकिन अब चुनाव बाद परीक्षा कराने की बात कह दी गई. यह युवाओं के साथ सरासर अन्याय है. उन्होंने मांग की कि चौथे चरण की वैकेंसी पूरी संख्या में जारी की जाए और तुरंत परीक्षा का नोटिफिकेशन आए.
सरकार की मंशा पर उठा सवाल
अभ्यर्थी प्रियंका पटेल ने शिक्षा मंत्री पर भरोसा जताने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि मंत्री कई बार समय सीमा बता चुके हैं लेकिन कोई भी बात सच साबित नहीं हुई. सितंबर में ही चौथे चरण की वैकेंसी का नोटिफिकेशन आने वाला था और अब चुनाव के बाद परीक्षा कराने की बात कहकर युवाओं को भ्रमित किया जा रहा है. उन्हें आशंका है कि चुनाव खत्म होते ही यह परीक्षा और टल जाएगी. उनका कहना है कि हजारों छात्र-छात्राओं ने सालों से तैयारी की है, ऐसे में यह विलंब बेहद निराशाजनक है.

9 सितंबर को पटना में बड़ा मार्च
अभ्यर्थियों ने घोषणा की है कि 9 सितंबर को पटना कॉलेज से पैदल मार्च निकाला जाएगा. यह मार्च बेली रोड तक जाएगा और इसमें हजारों शिक्षक अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है. अभ्यर्थियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो विधानसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर वोट बहिष्कार किया जाएगा. ऐसे में शिक्षक अभ्यर्थियों का यह आंदोलन सीधे तौर पर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश है. चुनाव से पहले सरकार के सामने युवाओं का गुस्सा सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.


