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पटना हाईकोर्ट ने EOU को दिए जांच के आदेश,12 लाख की स्कॉर्पियो 3.85 लाख में बेच दी

एम ए न्यूज डेस्क: नीरज कुमार के रिपोर्ट पटना से

पटना: बिहार में शराबबंदी कानून के तहत बड़ी अनियमित्ता सामने आयी है. मंगलवार को पटना हाईकोर्ट ने शराबबंदी कानून के तहत जब्त वाहनों की नीलामी मामले में सुनवाई की तो हैरान करने वाला खुलासा हुआ. याचिका दायर करने वाले वकील ने पटना हाईकोर्ट को बताया कि महंगी गाड़ी को मद्य निषेध विभाग ने कम कीमत में नीलाम कर दी.

कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं

सुनवाई में पटना हाईकोर्ट के जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सौरेंद्र पांडेय की खंडपीठ ने मुजफ्फरपुर के एक मामले में स्पष्ट कहा कि अधिकारियों ने कानून द्वारा तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया. पूरे मामले में मनमानी व दुर्भावना के संकेत मिलते हैं.

वाहन मालिक को नोटिस नहीं मिला

कोर्ट में हुई सुनवाई के अनुसार यह मामला मुजफ्फरपुर मद्य निषेद विभाग से जुड़ा है. मुजफ्फरपुर उत्पाद विभाग के द्वारा 2020 में एक स्कॉर्पियो जब्त की गयी थी. इस मामले में विभाग ने वाहन मालिक को न तो विधिवत शो-कॉज नोटिस दिया और न ही सुनवाई का अवसर दिया. विभाग ने 490 वाहनों के साथ उक्त स्कॉर्पियो को नीलाम कर दिया.

कम कीमत में बेच दी स्कॉर्पियो

कोर्ट को बताया गया कि स्कॉर्पियो की कीमत करीब ₹12.12 लाख रुपये थी, जो जब्ती से दो साल पहले खरीदी गयी थी. जिसको उत्पाद विभाग ने ₹3.85 लाख में बेच दिया. इस तरह का मामला सामने आने के बाद कोर्ट ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए.

सांठगांठ की आशंका

मंगलवार को सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि नीलामी से पहले आवश्यक अखबारी विज्ञापन नहीं किया गया. कुछ चुनिंदा लोग बार-बार कई वाहन खरीदते पाए गए, जिससे सांठगांठ की आशंका मजबूत होती है.

सरकार को भुगतान के आदेश

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह वाहन मालिक को ₹12,12,517 की राशि 6% वार्षिक ब्याज सहित और ₹10,000 मुकदमे के खर्च के रूप में भुगतान करे. साथ ही, इस नुकसान की भरपाई दोषी अधिकारियों से वसूली जाए. मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) को एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश दिए गए हैं.

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