बिहारबिहारशरीफब्रेकिंग न्यूज़

बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री, जननायक,भारतरत्न कपूरी ठाकुर जी का जयंती हर्षोल्लास के साथ बनाई गई।

एम ए न्यूज डेस्क नीरज कुमार के रिपोर्ट

बिहारशरीफ:- बिहारशरीफ के किसान बाग शहीद जगदेव चौक पर अतिपिछड़ा/ दलित अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा एवं फुटपाथ संघर्ष मोर्चा के तत्वाधान में बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री कपूरी ठाकुर के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित करते हुए उनकी जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।

इस मौके पर अतिपिछड़ा/दलित/ अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं फुटपाथ संघर्ष मोर्चा के जिला अध्यक्ष रामदेव चौधरी ने कहा कि भूतपूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर जी का जन्म 24 जनवरी 1924 को बिहार के समस्तीपुर गांव के पितौंझिया गांव में हुआ था,जिसे अब कपूरी ग्राम से जाना जाता है, वे नाई समाज में पैदा लिए थे। उनके पिता का नाम श्री गोकुल ठाकुर तथा माता जी का नाम श्रीमती रामदुलारी देवी था। उनके पिता गांव के सीमांत किसान थे तथा अपने पारंपरिक पेशा बाल काटने का काम करते थे।
कपूरी ठाकुर बिहार के एक महान समाजवादी नेता स्वतंत्रता सेनानी और दो बार मुख्यमंत्री रहे जिन्होंने सादगीपूर्ण जीवन और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष किया खासकर पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू किया और 23 जनवरी 2024 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया, वे अपने ईमानदारी और जनता से जुड़ाव के लिए “जननायक” कहलाए थे।

उन्होंने 1940 में मैट्रिक की परीक्षा पटना विश्वविद्यालय से द्वितीय श्रेणी में पास की।1942 का भारत छोड़ो आंदोलन छिड़ गया तो उसमें कूद पड़े। प्रणाम स्वरूप 26 महीने तक भागलपुर के कैंप जेल में जेल-यातना भुगतने के उपरांत 1945 में रिहा हुए। 1948 में आचार्य नरेन्द्रदेव एवं जयप्रकाश नारायण के सामाजिक दल में प्रादेशिक मंत्री बने। सन 1967 के आम चुनाव में कपूरी ठाकुर के नेतृत्व में संयुक्त समाजवादी दल (संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी) बड़ी ताकत के रूप में उभरी। 1970 में उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया। 1973-77 में वे लोकनायक जयप्रकाश के छात्र आंदोलन से जुड़ गए। 1977 में समस्तीपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से सांसद बने। 24 जून 1977 को पुणः मुख्यमंत्री बने। फिर 1980 में मध्यवर्ती चुनाव हुआ तो कपूरी ठाकुर के नेतृत्व में लोक दल बिहार विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरा और कपूरी ठाकुर नेता बने।
मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने
शिक्षा और सरकारी नौकरियों में पिछड़ों के लिए आरक्षण लागू किया (20% ओबीसी 3% महिला 3% आर्थिक रूप से कमजोर उच्च जाति के लिए)। शिक्षा मंत्री के रूप में अंग्रेजी की अनिवार्यता खत्म की और मैट्रिक तक फीस माफ की। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से मुफ्त अनाज देने के लिए अंत्योदय योजना लागू की। मुख्यमंत्री रहते हुए भी स्कूटर पर चलते और फटा कोट पहनकर विदेश दौरे पर गए गरीबी को गर्व से स्वीकार किया।
कपूरी ठाकुर का चिर परिचित नारा था_
सौ में नब्बे शोषित हैं,शोषितों ने ललकारा है।
धन,धरती और राज पाठ में नब्बे भाग हमारा है।
अधिकार चाहो तो लड़ना सीखो
पग-पग पर अड़ना सीखो
जीना है तो मरना सीखो।

कपूरी ठाकुर ने अपना जीवन समाज के शोषित और वंचित वर्गों की आवाज बनने और उनके उत्थान के लिए समर्पित कर दिया जो आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करता है। इस अवसर पर विभिन्न संगठनों द्वारा एक सभा की गई सभा की अध्यक्षता सम्राट अशोक जागृति मंच के जिला अध्यक्ष शिवकुमार कुशवाहा एवं संचालन डॉ भीमराव अंबेडकर संघर्ष विचार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल पासवान ने की।
इस मौके पर अतिपिछड़ा/ दलित/ अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा के जिला महासचिव उमेश पंडित महिला प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष चांदनी परवीन जिला कमेटी सदस्य सुरेंद्र शर्मा अर्जक संघ के जिला अध्यक्ष कमलेश कुमार कमल अखिल भारतीय रविदासिया धर्म संगठन के जिला अध्यक्ष बलराम दास चमार रेजीमेंट के जिला अध्यक्ष राकेश बौद्ध फुटपाथ संघर्ष मोर्चा के जिला महासचिव महेंद्र प्रसाद अवधेश पंडित अवधेश कुमार सुबोध पंडित रामप्रीत सिंह चौहान मुन्ना शर्मा पिंटू कुमार आदि लोग उपस्थित थे।

रामदेव चौधरी
अतिपिछड़ा/ दलित/ अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं फुटपाथ संघर्ष मोर्चा के जिला अध्यक्ष

Related Articles

Back to top button