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कुंआरी मां के संघर्ष ने दिलाई पहचान, बेटी के लिए कराया कोर्ट मैरिज

एम ए न्यूज डेस्क नीरज कुमार के रिपोर्ट औरंगाबाद से

  1. बिहार के औरंगाबाद से एक प्रेम प्रसंग का अनोखा और भावुक मामला सामने आया है, जहां नाबालिग लड़की को भगाने के आरोप में दर्ज केस के बीच आखिरकार कोर्ट के आदेश पर प्रेमी-प्रेमिका की शादी करा दी गई।
    मामला उस वक्त शुरू हुआ जब परिजनों ने एक युवक पर नाबालिग लड़की को भगाने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई। घटना के आठ दिन बाद पुलिस ने दोनों को दिल्ली से बरामद कर लिया। इसके बाद युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जबकि लड़की को परिजनों को सौंप दिया गया।
    कहानी में बड़ा मोड़ तब आया जब लड़की गर्भवती हो गई। उसने समाज के दबाव के बावजूद बच्चे को जन्म देने का फैसला लिया और एक बेटी को जन्म दिया। इस बीच वह बालिग भी हो गई, जबकि युवक जेल में ही बंद रहा।
    इसके बाद शुरू हुआ एक मां का संघर्ष—अपनी बेटी को पिता का नाम दिलाने का। लड़की ने कोर्ट में गुहार लगाई कि उसके प्रेमी को जमानत दी जाए ताकि वे दोनों शादी कर सकें और अपने बच्चे को एक पहचान दे सकें।
    मामले की सुनवाई कर रहे स्पेशल पोक्सो कोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से शादी के लिए तैयार हैं और बच्चे की जिम्मेदारी लेने का एकरारनामा देते हैं, तो आरोपी युवक को जमानत दी जा सकती है।
    कोर्ट के निर्देश के बाद दोनों पक्षों ने एकरारनामा दाखिल किया, जिसके बाद युवक को जमानत मिल गई। करीब आठ महीने जेल में रहने के बाद रिहा हुए युवक ने कोर्ट परिसर स्थित महावीर मंदिर में अपनी प्रेमिका से शादी कर ली।
    इस दौरान उनकी नौ माह की मासूम बेटी भी मौजूद रही, जो अपने माता-पिता की इस कानूनी शादी की गवाह बनी। शादी में दोनों पक्षों के परिजन और अधिवक्ता भी मौजूद रहे।
    शादी के बाद दंपति अपनी बेटी के साथ नए जीवन की शुरुआत करने के लिए रवाना हो गया। यह मामला जहां कानून, समाज और रिश्तों के जटिल पहलुओं को उजागर करता है, वहीं एक मां के संघर्ष और परिवार को जोड़ने की कोशिश की मिसाल भी पेश करता है।

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