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बिहार में गूँजी Gen-Z की आवाज़, शिक्षा-रोजगार और छात्र अधिकारों के सवाल पर जुटे छात्र-युवा

पटना | 6 सितंबर 2026

बिहार में शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की अनियमितता और छात्र-युवा अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर रविवार को पटना के एस.के. मेमोरियल हॉल में छात्र-युवाओं की आवाज़ बुलंद हुई। AISA-RYA के आह्वान पर “बिहार में गूँजेगी Gen-Z की आवाज़” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बिहार के अलग-अलग हिस्सों से आए छात्र-युवाओं, Gen-Z और Gen-Alpha पीढ़ी के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न आंदोलनों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति, रोजगार का संकट, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितता, छात्र आंदोलनों पर पुलिस-प्रशासनिक कार्रवाई और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने भविष्य, शिक्षा, रोजगार और अधिकारों को लेकर सवाल उठाने वाली पीढ़ी है।

तीन सत्रों में हुई कार्यक्रम की चर्चा

“बिहार में गूँजेगी Gen-Z की आवाज़” कार्यक्रम को तीन सत्रों में आयोजित किया गया। पहले सत्र का विषय “ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है” रखा गया। इस सत्र में हाल के छात्र-युवा आंदोलनों में शामिल रहे लोगों और संघर्ष का सामना करने वाले छात्र-युवाओं ने अपने अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम में विशाल ने पुलिस कार्रवाई से जुड़े अपने अनुभव सामने रखे। वहीं पटना विश्वविद्यालय आंदोलन में जेल जा चुकी छात्रा सबा आफ़रीन ने छात्र आंदोलनों के दौरान दमन और लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल पर अपनी बात रखी।

नोट्रे डेम एकेडमी, पटना की छात्रा भव्या ने आंदोलन और महिलाओं के ऑनलाइन हैरेसमेंट से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने छात्र-युवा आंदोलनों को और तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

जहानाबाद से जुड़े NEET मामले में पीड़ित छात्र के पिता नवीन ने न्याय और शिक्षा व्यवस्था से संबंधित सवालों को उठाया। वहीं पारा-मेडिकल आंदोलन के नेता भारत भूषण ने स्वास्थ्य शिक्षा और छात्रों के संघर्ष की स्थिति पर चर्चा की।

नवादा स्कूल की छात्राओं रूपा कुमारी और उन्नति ने स्कूली शिक्षा से जुड़े मुद्दों को मंच पर रखा। BPSC आंदोलन से जुड़े प्रियतम ने आंदोलन के अनुभव साझा किए, जबकि सरून ने बिहार दारोगा भर्ती परीक्षा से जुड़े छात्रों के सवालों को उठाया।

विश्वविद्यालय, रोजगार और छात्र आंदोलनों पर चर्चा

कार्यक्रम के दूसरे सत्र का विषय “आंदोलन की आवाज़” था। इस सत्र में विश्वविद्यालयों, शिक्षा, रोजगार और छात्र-युवा आंदोलनों से जुड़े व्यापक राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की गई।

प्राध्यापक एवं विश्वविद्यालय एक्ट 1976 आंदोलन की नेता चिंटू कुमारी ने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवालों को सामने रखा। उन्होंने विश्वविद्यालयों में लोकतांत्रिक माहौल और छात्रों की भागीदारी के महत्व पर चर्चा की।

पालीगंज के विधायक संदीप सौरभ ने छात्र-युवाओं से जुड़े सवालों को विधानसभा और व्यापक राजनीतिक मंचों तक ले जाने की प्रतिबद्धता जताई। वहीं RYA के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा ने रोजगार और नौजवानों के अधिकारों के मुद्दे पर आंदोलन को मजबूत करने की बात कही।

झारखंड के JPSC आंदोलन से जुड़ी हबीबा ने वहां के छात्र-युवा आंदोलनों के अनुभव साझा किए। इसके अलावा जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े इरफ़ान ने देशभर में उभर रहे छात्र-युवा आंदोलनों और उनके बीच एकजुटता की जरूरत पर अपनी बात रखी।

नेहा बोरा ने उठाए प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था के सवाल

 

कार्यक्रम का तीसरा और अंतिम सत्र “जो दरिया झूम के उठे हैं, तिनकों से न टाले जाएँगे” विषय पर केंद्रित रहा। इस सत्र में छात्र-युवा आंदोलनों की आगे की दिशा और व्यापक संघर्षों से उन्हें जोड़ने को लेकर चर्चा हुई।

AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने अपने संबोधन में कहा कि छात्र आंदोलनों को व्यापक सामाजिक संघर्षों से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई सवालों को प्रमुखता से उठाया।

नेहा बोरा ने 70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने, दारोगा परीक्षा में कथित धांधली के सवाल, BSSC की भर्तियों, प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा में छात्रों को उनकी OMR कॉपी उपलब्ध कराने और परीक्षा कैलेंडर जारी करने जैसी मांगों को प्रमुखता से उठाया।

उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 के तहत 7.5 CGPA की मांग को लेकर भी सवाल उठाया। इसके साथ ही सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को लेकर चिंता जताई गई।

कार्यक्रम में प्राध्यापक एवं व्यंग्यकार डॉ. मेड्यूसा ने भी शिक्षा और समाज से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज़ और विचारों को सामने रखने की बात कही।

दीपांकर भट्टाचार्य बोले- युवा आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता

कार्यक्रम के दौरान भाकपा-माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर उठ रही छात्र-युवा आवाज़ का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश और बिहार में इन मुद्दों पर उठ रही युवा आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।

उन्होंने छात्र-युवा आंदोलन के साथ किसान आंदोलन को भी आगे बढ़ाने की बात कही। कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने शिक्षा और रोजगार के सवालों को लेकर व्यापक आंदोलन की आवश्यकता पर जोर दिया।

Gen-Z केवल सोशल मीडिया की पीढ़ी नहीं”

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि Gen-Z को केवल सोशल मीडिया से जोड़कर देखना सही नहीं है। उनके मुताबिक यह ऐसी पीढ़ी है जो अपने भविष्य, शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर सवाल पूछ रही है।

वक्ताओं ने बिहार के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति, प्रतियोगी परीक्षाओं की अनियमितता, रोजगार के संकट और छात्र आंदोलनों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।

कार्यक्रम के अंत में छात्र-युवा आंदोलनों को आगे बढ़ाने और शिक्षा, रोजगार तथा लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवालों को व्यापक स्तर पर उठाने का संकल्प लिया गया।

आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य बिहार के छात्र-युवाओं और नई पीढ़ी की आवाज़ को एक साझा मंच देना तथा उनके सामने मौजूद शिक्षा, रोजगार और अधिकारों से जुड़े सवालों को व्यापक बहस का हिस्सा बनाना था।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) बिहार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम में विभिन्न छात्र-युवा आंदोलनों से जुड़े प्रतिनिधियों और वक्ताओं ने हिस्सा लिया।

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