पति की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने रखा वट सावित्री व्रत, पटना और पालीगंज में वट वृक्षों के नीचे उमड़ी श्रद्धा
एम ए न्यूज़ डेस्क नीरज कुमार के रिपोर्ट पटना से ।

ज्येष्ठ अमावस्या के पावन अवसर पर शनिवार को राजधानी पटना समेत पालीगंज अनुमंडल क्षेत्र में वट सावित्री व्रत को लेकर श्रद्धा, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह होते ही सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पूजा की थाली सजाए वट वृक्षों के नीचे पहुंचने लगीं। कहीं मंदिरों में भजन-कीर्तन गूंजता रहा तो कहीं महिलाओं ने सावित्री-सत्यवान की कथा सुनकर अखंड सौभाग्य की कामना की।

पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखे जाने वाले इस व्रत को लेकर महिलाओं में खास उत्साह देखने को मिला। कई स्थानों पर सुबह से ही मेले जैसा माहौल बन गया। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर पूजा स्थलों पर पहुंचीं और पूरे विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा की।
सुबह से मंदिरों और वट वृक्षों के पास लगी महिलाओं की भीड़
पटना और पालीगंज अनुमंडल क्षेत्र के राम जानकी ठाकुरवाड़ी मंदिर, मणीचक धाम, कैलूचक, संघत पर समेत कई गांवों और मंदिर परिसरों में सुबह 5 बजे से ही महिलाओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

राम जानकी ठाकुरवाड़ी मंदिर परिसर में महिलाओं ने वट वृक्ष के चारों ओर परिक्रमा कर कच्चे सूत का धागा बांधा और पति की दीर्घायु की कामना की। वहीं मणीचक धाम में हजारों की संख्या में महिलाएं पूजा-अर्चना के लिए पहुंचीं। कैलूचक और संघत पर स्थित वट वृक्षों के नीचे भी भक्तिमय माहौल देखने को मिला।

पूजा के दौरान महिलाओं ने फल, फूल, सिंदूर, अक्षत, मिठाई और पंखा अर्पित किया। कई महिलाओं ने निर्जला व्रत रखते हुए पूरे दिन पूजा-पाठ और कथा श्रवण किया।
सुहाग की रक्षा और अखंड सौभाग्य की कामना
वट सावित्री व्रत को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से पति की आयु लंबी होती है और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। यही कारण है कि हर वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सुहागिन महिलाएं श्रद्धा और विश्वास के साथ यह व्रत करती हैं।

महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी और अपने परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की। पूजा के बाद बड़ों का आशीर्वाद लिया गया और प्रसाद वितरण किया गया।

कई महिलाओं ने बताया कि यह व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि पति-पत्नी के अटूट विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। इसलिए वे हर वर्ष पूरे श्रद्धा भाव से यह व्रत रखती हैं।
पूजा का शुभ मुहूर्त
आचार्य रामाशंकर दुबे के अनुसार, वट सावित्री व्रत की पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 7 बजकर 12 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 24 मिनट तक रहा। वहीं अमावस्या तिथि की शुरुआत सुबह 5 बजकर 11 मिनट से हुई, जो रात 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी।

आचार्यों के अनुसार, सुहागिन महिलाओं को सुबह स्नान कर लाल या पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा की थाली में फल, फूल, सिंदूर, अक्षत, धूप, दीप और पंखा रखकर वट वृक्ष के नीचे पूजा करनी चाहिए। इसके बाद वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए लाल या पीला धागा बांधना शुभ माना जाता है।
निर्जला व्रत रखकर की पूजा
कई महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखा और विधि-विधान से पूजा संपन्न की। पूजा के दौरान महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-शांति की कामना की।

पूजा समाप्त होने के बाद महिलाओं ने ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दी और प्रसाद ग्रहण किया। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से कथा पाठ और भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया गया।
क्या है सावित्री-सत्यवान की कथा?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी सावित्री अपने पति सत्यवान से अत्यंत प्रेम करती थीं। जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे तो सावित्री ने अपनी बुद्धिमत्ता, तप और समर्पण से यमराज को रोक लिया। उनकी अटूट निष्ठा और भक्ति से प्रसन्न होकर यमराज ने सत्यवान के प्राण वापस लौटा दिए।

कहा जाता है कि सावित्री को अपने पति के जीवन का वरदान वट वृक्ष के नीचे ही प्राप्त हुआ था। तभी से वट वृक्ष की पूजा का विधान शुरू हुआ और वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष पर्व बन गया।
गांव से शहर तक दिखी आस्था की झलक
पटना और पालीगंज के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर तक हर तरफ धार्मिक वातावरण देखने को मिला। मंदिरों में घंटियों की आवाज, महिलाओं के मंगल गीत और पूजा-अर्चना से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।

वट सावित्री व्रत ने एक बार फिर भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और पति-पत्नी के अटूट रिश्ते की परंपरा को जीवंत कर दिया।



