पटना में ‘नृत्यांजलि’ का भव्य आयोजन, 13 विद्यालयों के करीब 300 बच्चों ने बिखेरा प्रतिभा का रंग

पटना: लायंस क्लब ऑफ पटना अनंता की ओर से पटना के रविंद्र भवन में अंतर-विद्यालय नृत्य प्रतियोगिता ‘नृत्यांजलि’ का भव्य आयोजन किया गया। कला, संस्कृति और प्रतिभा को समर्पित इस कार्यक्रम में पटना के 13 विद्यालयों से करीब 300 बच्चों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी शानदार नृत्य प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया और पूरे सभागार में कला एवं संस्कृति की खूबसूरत झलक देखने को मिली।

‘नृत्यांजलि’ प्रतियोगिता को तीन प्रमुख श्रेणियों—सेमी-क्लासिकल, कंटेम्परेरी और रीजनल डांस—में आयोजित किया गया। अलग-अलग विद्यालयों से पहुंचे प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी श्रेणी में आकर्षक प्रस्तुतियां देकर अपनी मेहनत, रचनात्मकता, ऊर्जा और नृत्य कौशल का प्रदर्शन किया। मंच पर बच्चों की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया और कई प्रस्तुतियों के दौरान तालियों की गूंज सुनाई देती रही।

इस आयोजन की खास बात केवल प्रतियोगिता और नृत्य प्रस्तुतियां ही नहीं रहीं, बल्कि इसमें समाज के अलग-अलग वर्गों के बच्चों को एक समान मंच उपलब्ध कराया गया। शहर के बड़े विद्यालयों के प्रतिभाशाली छात्रों के साथ-साथ स्लम बस्ती के बच्चों और ट्रांसजेंडर बच्चों को भी अपनी कला और प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला। इस पहल ने कार्यक्रम को सामाजिक समावेशन और समान अवसर का एक महत्वपूर्ण संदेश देने वाला मंच बना दिया।

‘नृत्यांजलि’ के मंच पर बच्चों ने यह संदेश दिया कि प्रतिभा किसी वर्ग, पृष्ठभूमि या पहचान की मोहताज नहीं होती। जब बच्चों को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलता है तो वे अपनी मेहनत और हुनर से किसी भी मंच पर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। इसी सोच के साथ आयोजित यह कार्यक्रम दर्शकों और प्रतिभागियों के लिए यादगार बन गया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं उद्घाटक पटना नगर निगम की महापौर श्रीमती सीता साहू रहीं। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने प्रतिभागी बच्चों का उत्साहवर्धन किया और उन्हें अपनी प्रतिभा को लगातार निखारने के लिए प्रेरित किया। उनके द्वारा कार्यक्रम के आयोजन की सराहना भी की गई।

प्रतियोगिता में प्रस्तुतियों का मूल्यांकन करने के लिए कला एवं नृत्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का निर्णायक मंडल बनाया गया था। निर्णायक मंडल में शर्मिष्ठा बनर्जी, डॉ. पूनम चौधरी, सोमा चक्रवर्ती एवं रामचंद्र गोल्डर शामिल रहे। निर्णायकों ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का विभिन्न मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया। नृत्य की प्रस्तुति, भाव-भंगिमा, तालमेल, रचनात्मकता और मंच पर प्रस्तुति जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रतिभागियों के प्रदर्शन का आकलन किया गया।

आयोजकों के अनुसार, लायंस क्लब ऑफ पटना अनंता का उद्देश्य बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए बेहतर और सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही बच्चों में भारतीय संस्कृति, कला और नृत्य के प्रति रुचि पैदा करना भी क्लब की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। ‘नृत्यांजलि’ इसी उद्देश्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में आयोजित की गई।

कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक, अभिभावक, लायंस क्लब के सदस्य और शहर के कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। बच्चों के उत्साह और शानदार प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। अभिभावकों के लिए भी यह अवसर खास रहा, जहां उन्होंने अपने बच्चों को बड़े मंच पर आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुति देते हुए देखा।

विशेष रूप से स्लम बस्ती और ट्रांसजेंडर बच्चों की भागीदारी ने कार्यक्रम को सामाजिक सरोकार से जोड़ दिया। एक ही मंच पर अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से आए बच्चों का साथ आना इस आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में रहा। इससे यह संदेश भी सामने आया कि कला और संस्कृति लोगों को जोड़ने का काम करती है और प्रतिभा को अवसर देने के लिए किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

‘नृत्यांजलि’ में बच्चों की प्रस्तुतियों में उत्साह, आत्मविश्वास और रचनात्मकता की झलक देखने को मिली। सेमी-क्लासिकल की शास्त्रीय छटा से लेकर कंटेम्परेरी की आधुनिक ऊर्जा और रीजनल डांस की लोक-सांस्कृतिक रंगत तक, अलग-अलग प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विविधता से भर दिया।

लायंस क्लब ऑफ पटना अनंता की यह पहल बच्चों के लिए केवल एक प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्हें अपनी प्रतिभा पहचानने, मंच पर आत्मविश्वास विकसित करने और कला के प्रति अपनी रुचि को आगे बढ़ाने का अवसर भी मिला। आयोजन ने यह साबित किया कि यदि बच्चों को सही मंच और प्रोत्साहन दिया जाए तो वे अपनी प्रतिभा से समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण पेश कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, रविंद्र भवन में आयोजित ‘नृत्यांजलि’ अंतर-विद्यालय नृत्य प्रतियोगिता कला, संस्कृति, प्रतिभा और सामाजिक समावेशन का खूबसूरत संगम बनकर सामने आई। 13 विद्यालयों के करीब 300 बच्चों की भागीदारी, विभिन्न नृत्य शैलियों की शानदार प्रस्तुतियां और अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से आए बच्चों को समान मंच मिलना इस आयोजन की खास पहचान रही। बच्चों की ऊर्जा और प्रतिभा ने पूरे कार्यक्रम को यादगार बना दिया।



