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PMCH के छात्रों का प्रदर्शन: “हॉस्टल की बदहाली से बर्बाद हो रहा भविष्य”, पढ़ाई और प्रशिक्षण पर संकट

एम ए न्यूज डेस्क नीरज कुमार के रिपोर्ट पटना से।

पटना: बिहार के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में शामिल PMCH (पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल) एक बार फिर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर चर्चा में है। गुरुवार को PMCH के 2023–26 बैच के छात्रों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कॉलेज परिसर में प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना है कि हॉस्टल की जर्जर स्थिति और प्रशासन की अनिश्चितता के कारण उनकी पढ़ाई, प्रशिक्षण और भविष्य पर गंभीर असर पड़ रहा है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने बताया कि कुछ सप्ताह पहले कॉलेज प्रशासन ने हॉस्टल की खराब स्थिति और मरम्मत कार्य का हवाला देते हुए उन्हें हॉस्टल खाली करने का निर्देश दिया था। उस समय यह आश्वासन दिया गया था कि लगभग एक सप्ताह के भीतर मरम्मत कार्य पूरा कर छात्रों को दोबारा बुला लिया जाएगा। लेकिन अब करीब एक महीना बीत जाने के बावजूद न तो हॉस्टल चालू हुआ है और न ही छात्रों को वापस बुलाने को लेकर कोई आधिकारिक सूचना जारी की गई है।

छात्रों का कहना है कि उनका बैच पहले से ही शैक्षणिक सत्र में पीछे चल रहा है। ऐसे में एक महीने से अधिक समय तक पढ़ाई और प्रशिक्षण प्रभावित होने से उनका पूरा अकादमिक कैलेंडर बिगड़ता जा रहा है। उनका कहना है कि मेडिकल शिक्षा केवल किताबों और ऑनलाइन क्लास तक सीमित नहीं होती, बल्कि नियमित प्रैक्टिकल, क्लिनिकल पोस्टिंग और अस्पताल में ड्यूटी इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया कि फिलहाल प्रशासन केवल ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने की बात कर रहा है, लेकिन ड्यूटी और प्रैक्टिकल शुरू कराने को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया है। उनका कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई से मेडिकल शिक्षा का व्यावहारिक पक्ष पूरा नहीं हो सकता।

छात्रों की प्रमुख मांग है कि जब तक हॉस्टल पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक उन्हें बाहर किराये के मकान या अन्य निजी व्यवस्था में रहकर नियमित रूप से अस्पताल में ड्यूटी, प्रैक्टिकल और कक्षाओं में भाग लेने की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि यदि कॉलेज यह अनुमति नहीं देता, तो सरकार और प्रशासन उनके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल उपलब्ध कराए ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो।

छात्रों ने कहा कि वे किसी भी स्थिति में तीन वर्ष का कोर्स पांच वर्ष में पूरा नहीं करना चाहते। उनका कहना है कि मेडिकल शिक्षा पहले ही काफी चुनौतीपूर्ण होती है और यदि प्रशासनिक कारणों से पढ़ाई प्रभावित होती रही तो इसका सीधा असर उनके करियर और भविष्य पर पड़ेगा।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यह भी कहा कि PMCH को बिहार का नंबर-वन मेडिकल कॉलेज कहा जाता है, लेकिन यहां छात्रों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित हॉस्टल सुविधा उपलब्ध नहीं है। उनका आरोप है कि उन्हें PMCH से स्थानांतरित कर NMCH भेजा गया, जहां की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। इसके बावजूद छात्र परिस्थितियों के अनुसार खुद को समायोजित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।

छात्रों ने यह भी सवाल उठाया कि हॉस्टल के नवीनीकरण का कार्य आखिर कब पूरा होगा, इसकी कोई निश्चित समय-सीमा प्रशासन की ओर से नहीं बताई जा रही है। लगातार अनिश्चितता के कारण छात्र मानसिक तनाव में हैं और उन्हें अपने भविष्य की चिंता सता रही है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि वे कॉलेज प्रशासन और राज्य सरकार से टकराव नहीं चाहते, बल्कि केवल इतना चाहते हैं कि उनकी पढ़ाई और प्रशिक्षण बिना किसी बाधा के जारी रहे। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जल्द से जल्द स्पष्ट निर्णय लेकर हॉस्टल, ड्यूटी और कक्षाओं को लेकर आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेंगे। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपने भविष्य और मेडिकल शिक्षा को बचाना है।

फिलहाल PMCH प्रशासन की ओर से छात्रों की मांगों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कॉलेज प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या फैसला लेते हैं और छात्रों की समस्याओं का समाधान कब तक हो पाता है।

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