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पटना मेट्रो के पाटलीपुत्र बस टर्मिनल स्टेशन पर बिहार एटीएस की संयुक्त आतंकरोधी मॉक ड्रिल

एम ए न्यूज़ डेस्क नीरज कुमार के रिपोर्ट पटना से

पटना, 26 मई 2026

राजधानी पटना में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत एवं आधुनिक बनाने की दिशा में सोमवार को एक महत्वपूर्ण संयुक्त आतंकरोधी मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया। यह अभ्यास पाटलीपुत्र बस टर्मिनल मेट्रो स्टेशन परिसर में आयोजित किया गया, जिसका नेतृत्व बिहार पुलिस आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) द्वारा किया गया।

इस व्यापक सुरक्षा अभ्यास का उद्देश्य किसी भी संभावित आतंकी हमले, विस्फोट, बंधक संकट अथवा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में विभिन्न सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, समन्वय एवं कार्यप्रणाली का परीक्षण करना था।

मॉक ड्रिल के दौरान पूरे स्टेशन परिसर को हाई अलर्ट जोन में तब्दील कर दिया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवादी गतिविधि की काल्पनिक सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र की घेराबंदी, संदिग्धों की तलाश, घायलों के रेस्क्यू, भीड़ नियंत्रण तथा बम निरोधक कार्रवाई जैसी प्रक्रियाओं का अभ्यास किया। इस दौरान मेट्रो स्टेशन परिसर में वास्तविक आपातकालीन स्थिति जैसा माहौल देखने को मिला।

कई एजेंसियों ने लिया संयुक्त रूप से भाग

इस संयुक्त आतंकरोधी मॉक ड्रिल में कई महत्वपूर्ण विभागों एवं सुरक्षा एजेंसियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इनमें प्रमुख रूप से:

आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS)

विशेष कार्य बल (STF)

पटना पुलिस

औद्योगिक सुरक्षा बल

BSAP-05

ERSS

राज्य आपदा मोचन बल (SDRF)

अग्निशमन सेवा (फायर ब्रिगेड)

स्वास्थ्य विभाग

पटना मेट्रो रेल परियोजना

जिला प्रशासन

सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी एवं जवान शामिल रहे।

अधिकारियों ने बताया कि मेट्रो स्टेशन जैसे संवेदनशील एवं भीड़भाड़ वाले स्थानों पर इस प्रकार के अभ्यास अत्यंत आवश्यक हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में त्वरित एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता का हुआ परीक्षण

मॉक ड्रिल के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने अलग-अलग चरणों में कार्रवाई का प्रदर्शन किया। अभ्यास की शुरुआत एक काल्पनिक आतंकी हमले की सूचना से हुई, जिसके बाद ATS एवं अन्य सुरक्षा बलों ने तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर मोर्चा संभाला।

ड्रिल के दौरान:

संदिग्ध क्षेत्रों की तलाशी ली गई

बम निरोधक दस्ते द्वारा जांच की गई

घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास हुआ

एंबुलेंस और मेडिकल टीम को सक्रिय किया गया

अग्निशमन विभाग ने आग बुझाने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया

SDRF टीम ने राहत एवं बचाव कार्य संचालित किया

भीड़ नियंत्रण एवं सुरक्षित निकासी की रणनीति अपनाई गई

पूरे अभियान के दौरान विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था और प्रतिक्रिया समय का विशेष परीक्षण किया गया।

मेट्रो स्टेशन पर दिखी हाई लेवल सुरक्षा तैयारी

ड्रिल के दौरान मेट्रो स्टेशन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय दिखाई दी। जवान अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरणों और हथियारों के साथ मुस्तैद नजर आए। बम निरोधक दस्ते एवं डॉग स्क्वायड की सहायता से संदिग्ध वस्तुओं की जांच की गई।

मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता का परीक्षण करना ही नहीं, बल्कि आम लोगों में भी सुरक्षा जागरूकता बढ़ाना था। अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के अभ्यास से किसी भी वास्तविक संकट की स्थिति में लोगों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने और अफरा-तफरी रोकने में मदद मिलती है।

बिहार ATS ने बताया सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण

बिहार पुलिस आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) के अधिकारियों ने कहा कि राज्य की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए आधुनिक तकनीक, बेहतर समन्वय एवं नियमित प्रशिक्षण के माध्यम से सुरक्षा एजेंसियों को लगातार तैयार किया जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार की संयुक्त मॉक ड्रिल भविष्य में किसी भी संभावित आतंकी चुनौती या आपातकालीन परिस्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता को और अधिक मजबूत बनाती है।

उन्होंने कहा कि पटना मेट्रो जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन केंद्रों पर सुरक्षा के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए समय-समय पर इस तरह के संयुक्त अभ्यास आगे भी आयोजित किए जाएंगे।

राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को मिलेगा और बल

यह सफल संयुक्त अभ्यास बिहार की सुरक्षा एजेंसियों की पेशेवर दक्षता, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता एवं समन्वित कार्यशैली का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है। मॉक ड्रिल ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसी भी संभावित सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए राज्य की विभिन्न एजेंसियां पूरी तरह तैयार और सतर्क हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार होने वाले ऐसे अभ्यास न केवल सुरक्षा तंत्र को मजबूत करते हैं, बल्कि आम नागरिकों में भी विश्वास पैदा करते हैं कि किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन एवं सुरक्षा एजेंसियां पूरी तत्परता के साथ कार्य करने में सक्षम हैं।

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