बिहार के विकास को लेकर CM सम्राट चौधरी की केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से अहम मुलाकात, सीतामढ़ी-अयोध्या के बीच चलेगी वंदे भारत एक्सप्रेस; छठ और दीपावली पर 15 हजार ट्रेनों के संचालन की तैयारी
एम ए न्यूज डेस्क नीरज कुमार के रिपोर्ट पटना से।

पटना, 03 नवंबर 2026। बिहार में रेलवे नेटवर्क के विस्तार, औद्योगिक निवेश, आईटी सेक्टर को मजबूत बनाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक में बिहार के विकास से जुड़े कई बड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने जहां दीपावली और छठ महापर्व पर बिहार आने-जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें चलाने का अनुरोध किया, वहीं कई लंबित रेल परियोजनाओं को जल्द पूरा करने और नई रेल सुविधाएं शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा।
बैठक में रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, औद्योगिक क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने, मढ़ौरा और मधेपुरा रेल कारखानों की उत्पादन क्षमता दोगुनी करने तथा सीतामढ़ी से अयोध्या के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक चर्चा हुई। इसके साथ ही बिहार में मैन्युफैक्चरिंग सिटी, सेमीकंडक्टर उद्योग और बड़ी बीपीओ कंपनियों की स्थापना की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
सीतामढ़ी-अयोध्या के बीच चलेगी वंदे भारत एक्सप्रेस
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बैठक के दौरान सीतामढ़ी और अयोध्या के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन चलाने का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्री के सामने रखा। इस प्रस्ताव पर अश्विनी वैष्णव ने सहमति जताई। इस रेल सेवा के शुरू होने से बिहार के लोगों को अयोध्या तक आने-जाने में काफी सहूलियत मिलने की उम्मीद है। खासकर धार्मिक यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा। सीतामढ़ी माता सीता की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है, जबकि अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मभूमि होने के कारण देशभर के श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। ऐसे में दोनों शहरों के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस का प्रस्ताव धार्मिक पर्यटन को भी नई गति दे सकता है।
मढ़ौरा और मधेपुरा रेल कारखानों की क्षमता होगी दोगुनी
बैठक में बिहार के मढ़ौरा और मधेपुरा स्थित रेल इंजन निर्माण कारखानों के भविष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के बीच इन दोनों कारखानों को आधुनिक जरूरतों के अनुसार विकसित करने और इनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर विचार किया गया।

मौजूदा उत्पादन व्यवस्था वर्ष 2028 में समाप्त होने के लगभग छह महीने बाद नए स्वरूप में उत्पादन दोबारा शुरू करने की दिशा में पहल की जाएगी। इसके साथ ही दोनों रेल कारखानों की क्षमता दोगुनी करने की योजना पर भी चर्चा हुई। यदि यह योजना जमीन पर उतरती है तो बिहार के औद्योगिक विकास को मजबूती मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
गयाजी के औद्योगिक क्षेत्र को रेल नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने गयाजी में विकसित हो रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर यानी IMC को बेहतर रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। इस पर केंद्रीय रेल मंत्री ने कहा कि यदि राज्य सरकार आवश्यक भूमि अधिग्रहण सुनिश्चित करती है तो रेलवे डोभी-चतरा रेल लाइन से गयाजी के औद्योगिक क्षेत्र तक नई संपर्क रेल लाइन बिछाने के लिए तैयार है।
इस रेल संपर्क के विकसित होने से औद्योगिक इकाइयों को कच्चा माल पहुंचाने और तैयार उत्पादों को देश के अलग-अलग हिस्सों तक भेजने में काफी सुविधा होगी। इससे गयाजी में स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाइयों को लॉजिस्टिक्स के स्तर पर बड़ा फायदा मिल सकता है।
बिहटा-औरंगाबाद और सुल्तानगंज-कटोरिया रेल परियोजनाओं पर चर्चा
बैठक में बिहार की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को गति देने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने बिहटा-औरंगाबाद और सुल्तानगंज-कटोरिया रेल लाइन परियोजनाओं के काम में तेजी लाने का विषय उठाया। इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।
इसके अतिरिक्त प्रस्तावित विक्रमशिला-कटरिया रेल लाइन के अंतर्गत गंगा नदी पर रेल-सह-सड़क पुल के निर्माण को लेकर भी बातचीत हुई। इस पुल के निर्माण से रेल और सड़क दोनों माध्यमों से आवागमन को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के साथ-साथ व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
दीपावली और छठ पर 15 हजार ट्रेनों के संचालन की व्यवस्था
बिहार के लिए दीपावली और छठ महापर्व के दौरान स्पेशल ट्रेनें चलाने का मुद्दा भी मुख्यमंत्री की बैठक में प्रमुख रहा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय रेल मंत्री से अनुरोध किया कि त्योहारों के दौरान दूसरे राज्यों में रहने वाले बिहार के लोगों को अपने घर पहुंचने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए पर्याप्त संख्या में अतिरिक्त ट्रेनें चलाई जाएं।

इस पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि दीपावली और छठ महापर्व के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए सामान्य तौर पर संचालित लगभग 12 हजार ट्रेनों की तुलना में 15 हजार ट्रेनों के संचालन की व्यवस्था की गई है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य त्योहारों के दौरान बिहार आने वाले लाखों यात्रियों को बेहतर रेल सुविधा उपलब्ध कराना है। खासकर दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और देश के अन्य राज्यों में रहने वाले बिहार के लोगों को घर पहुंचने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
जनवरी 2027 में गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के 360वें प्रकाश पर्व पर चलेंगी अतिरिक्त ट्रेनें
बैठक में जनवरी 2027 में पटना साहिब में आयोजित होने वाले श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के 360वें प्रकाश पर्व को लेकर भी अहम निर्णय की जानकारी सामने आई। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस बड़े धार्मिक आयोजन में देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 9 जनवरी से 16 जनवरी 2027 के बीच बिहार के लिए अतिरिक्त ट्रेनें चलाई जाएंगी।
इससे देश के अलग-अलग राज्यों से पटना साहिब पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन में सहूलियत मिलेगी। प्रकाश पर्व को देखते हुए रेलवे की ओर से अतिरिक्त रेल सेवाओं की व्यवस्था धार्मिक आयोजन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बिहार में बनेगी मैन्युफैक्चरिंग सिटी, चमड़ा और वस्त्र उद्योग पर रहेगा फोकस
रेलवे परियोजनाओं के अलावा बैठक में बिहार को बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बिहार में एक बड़ी मैन्युफैक्चरिंग सिटी विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने विशेष रूप से चमड़ा और वस्त्र उद्योग पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई।
इसका उद्देश्य बिहार में बड़े पैमाने पर औद्योगिक इकाइयों की स्थापना करना और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। यदि इन क्षेत्रों में बड़े निवेश आते हैं तो राज्य में उत्पादन, व्यापार और निर्यात से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
इसके साथ ही बिहार में चल रही सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित परियोजनाओं की नियमित समीक्षा करने पर भी जोर दिया गया। विशेष रूप से बिहार वन परियोजना की प्रगति की लगातार समीक्षा करने की बात कही गई, ताकि आईटी आधारित सेवाओं और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार तेजी से किया जा सके।
राजापाकर में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग लगाने की संभावना
मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के बीच वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग में बिहार की भागीदारी बढ़ाने को लेकर भी महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ। बैठक में बिहार के राजापाकर क्षेत्र में बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग की स्थापना की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

केंद्रीय मंत्री ने सुझाव दिया कि राजापाकर में उपलब्ध जमीन का ए-3 आकार का विस्तृत नक्शा तैयार कराया जाए। इस नक्शे में सड़क और रेल संपर्क, विद्युत आपूर्ति लाइन तथा अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की स्पष्ट जानकारी शामिल होनी चाहिए।
इसके आधार पर फॉक्सकॉन जैसी बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी को उसकी जरूरतों के मुताबिक जमीन का चयन करने का विकल्प दिया जा सकता है। इस पहल से बिहार में बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निवेश को आकर्षित करने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
बड़ी बीपीओ कंपनी को बिहार में निवेश के लिए आमंत्रित करने का अनुरोध
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में आईटी आधारित रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसी बड़ी बीपीओ कंपनी को प्रमुख निवेशक के रूप में स्थापित कराने का अनुरोध भी केंद्रीय मंत्री से किया। इसका उद्देश्य राज्य के युवाओं को तकनीकी और डिजिटल क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
बिहार में बड़ी बीपीओ कंपनियों की स्थापना होने से युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने की मजबूरी कम हो सकती है। इसके साथ ही आईटी, डिजिटल सर्विस और तकनीकी प्रशिक्षण से जुड़े नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं।
केंद्र और राज्य के समन्वय से बिहार के विकास को मिलेगी नई गति
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के बीच हुई यह बैठक बिहार के रेलवे, औद्योगिक और आईटी क्षेत्र के विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में जहां सीतामढ़ी-अयोध्या वंदे भारत एक्सप्रेस को लेकर सहमति बनी, वहीं मढ़ौरा और मधेपुरा रेल कारखानों की क्षमता दोगुनी करने, गयाजी के औद्योगिक क्षेत्र को रेल नेटवर्क से जोड़ने और कई रेल परियोजनाओं में तेजी लाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
इसके अलावा दीपावली और छठ के लिए 15 हजार ट्रेनों के संचालन की व्यवस्था तथा जनवरी 2027 में पटना साहिब के प्रकाश पर्व के लिए 9 से 16 जनवरी तक अतिरिक्त ट्रेनें चलाने की जानकारी दी गई।
कुल मिलाकर, इस बैठक में बिहार को केवल बेहतर रेल सुविधाएं देने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि राज्य को मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और आईटी सेक्टर का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में भी चर्चा हुई। अब इन प्रस्तावों और योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय और आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।



