बिहार में निगरानी विभाग की बड़ी कार्रवाई, दो जिलों में तीन सर्वे अमीन रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार
एम ए न्यूज डेस्क नीरज कुमार के रिपोर्ट पटना से।

गयाजी में 7 हजार और सहरसा में 5 हजार रुपये लेते पकड़े गए आरोपी, जमीन सर्वे और मापी रिपोर्ट बनाने के नाम पर मांगी जा रही थी रिश्वत

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को ब्यूरो की टीम ने गयाजी और सहरसा जिले में दो अलग-अलग मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल तीन विशेष सर्वे अमीन को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। दोनों मामलों में कुल 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते आरोपियों को पकड़ा गया है। निगरानी विभाग की इस कार्रवाई से सरकारी महकमों में हड़कंप मच गया है।
पहली कार्रवाई गयाजी जिले के सदर अंचल में की गई। यहां तैनात विशेष सर्वे अमीन दीपू कुमार और अभिषेक कुमार को 7 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। निगरानी विभाग के अनुसार, शिकायतकर्ता रोहित कुमार ने अपनी जमीन की मापी के लिए निर्धारित सरकारी शुल्क जमा किया था। जमीन की मापी भी पूरी हो चुकी थी, लेकिन मापी से संबंधित रिपोर्ट तैयार करने के बदले आरोपियों द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही थी।
इसके बाद पीड़ित ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत का सत्यापन कराया गया, जिसमें रिश्वत मांगे जाने की बात सही पाई गई। इसके बाद निगरानी थाना कांड संख्या 128/26 दर्ज कर पुलिस उपाधीक्षक मो. वसीम फिरोज के नेतृत्व में धावादल गठित किया गया। टीम ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गयाजी के राय काशीनाथ मोड़ स्थित एपीआर मॉल के सामने से 7 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया।
वहीं दूसरी कार्रवाई सहरसा जिले में की गई। यहां सोनवर्षा अंचल के नोनैती मौजा में तैनात विशेष सर्वे अमीन दीपक राज को 5 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि अमीन द्वारा शिकायतकर्ता प्रभात कुमार से उनकी पैतृक जमीन के सर्वे के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी।
इस मामले में भी पीड़ित ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत की थी। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद निगरानी थाना कांड संख्या 129/26 दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक अमरेन्द्र प्रसाद विद्यार्थी के नेतृत्व में गठित टीम ने बसनही थाना क्षेत्र के मंगवार स्थित दीपक राज के किराये के आवास-सह-निजी कार्यालय में छापेमारी कर उसे 5 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
निगरानी विभाग के अनुसार, दोनों मामलों में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। गयाजी के दोनों आरोपियों को पटना स्थित विशेष निगरानी न्यायालय में, जबकि सहरसा के आरोपी को भागलपुर स्थित विशेष निगरानी न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा। दोनों मामलों में आगे की अनुसंधान प्रक्रिया जारी है।
**2026 में निगरानी की कार्रवाई ने बनाया नया रिकॉर्ड**
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ ये क्रमशः 128वां और 129वां प्राथमिकी दर्ज करने का मामला है। एक अन्य मामले को जिले से स्थानांतरित किए जाने के बाद ब्यूरो के पास कुल 130 मामले अनुसंधान के लिए हैं।
वहीं, रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार करने से जुड़े मामलों की संख्या इस वर्ष अब तक 118 पहुंच चुकी है। इन मामलों में कुल 119 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। बरामद रिश्वत की कुल राशि 40 लाख 60 हजार 400 रुपये बताई गई है। इसके अलावा 37 हजार रुपये कीमत की एक नई वाशिंग मशीन भी बरामद की गई है।
अगर पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2025 में कुल 101 ट्रैप मामले दर्ज किए गए थे और 37 लाख 80 हजार 300 रुपये रिश्वत की राशि बरामद हुई थी। निगरानी ब्यूरो के मुताबिक, झारखंड राज्य के गठन के बाद वर्ष 2000 से 2024 तक प्रति वर्ष औसतन 47 ट्रैप मामले दर्ज होते थे, जबकि वर्ष 2026 में अब तक यह आंकड़ा 118 तक पहुंच गया है।

ऐसे में गयाजी और सहरसा में एक ही दिन हुई दो बड़ी कार्रवाइयों ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की सक्रियता को सामने ला दिया है। ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध उसकी कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।



