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पटना और नवादा में निगरानी ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई: 40 हजार और 10 हजार रुपये रिश्वत लेते दो सरकारी कर्मी रंगे हाथ गिरफ्तार

एम ए न्यूज़ डेस्क नीरज कुमार के रिपोर्ट।

पटना/नवादा: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। इसी कड़ी में 3 जून 2026 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने पटना और नवादा जिले में दो अलग-अलग ट्रैप कार्रवाई करते हुए दो सरकारी अधिकारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इन दोनों मामलों में कुल 50 हजार रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई है।

पहले मामले में स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को 40 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया, जबकि दूसरे मामले में नवादा जिले के एक ग्रामीण आवास सहायक को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए दबोचा गया। ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के विरुद्ध यह 67वां और 68वां प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई है।

पहली बड़ी कार्रवाई: स्वास्थ्य विभाग के क्षेत्रीय अपर निदेशक 40 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. अजय कुमार, क्षेत्रीय अपर निदेशक, तिरहुत प्रमंडल, स्वास्थ्य विभाग, बिहार को 40 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

ब्यूरो के अनुसार यह कार्रवाई निगरानी थाना कांड संख्या-068/26, दिनांक 02 जून 2026 के आधार पर की गई। आरोपी अधिकारी को पटना के गोविंद मित्रा रोड स्थित अशोका पैलेस के समीप रिश्वत की राशि लेते समय गिरफ्तार किया गया।

क्या है पूरा मामला?

मामले के परिवादी विवेक सिंह ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी श्रीमती नेहा कुमारी वर्तमान में वैशाली जिले के महनार स्थित एएनएम स्कूल सह छात्रावास एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सहदेई बुजुर्ग में प्रभारी प्राचार्या के पद पर कार्यरत हैं।

शिकायत के अनुसार श्रीमती नेहा कुमारी गर्भवती हैं और उनकी देखभाल के लिए विवेक सिंह उनके साथ रह रहे थे। आरोप है कि क्षेत्रीय अपर निदेशक डॉ. अजय कुमार द्वारा विवेक सिंह से उनकी पत्नी के साथ रहने देने के बदले रिश्वत की मांग की जा रही थी।

परिवादी ने यह भी आरोप लगाया कि रिश्वत नहीं देने पर उन्हें विभिन्न आरोप लगाकर नौकरी से हटाने तथा उनकी पत्नी को निलंबित कराने की धमकी दी जा रही थी।

सत्यापन में सही पाए गए आरोप

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले का सत्यापन कराया। जांच के दौरान यह प्रमाणित हुआ कि आरोपी अधिकारी द्वारा वास्तव में रिश्वत की मांग की जा रही थी।

प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद निगरानी थाना में मामला दर्ज किया गया और पुलिस उपाधीक्षक रीता सिन्हा के नेतृत्व में विशेष धावादल (ट्रैप टीम) का गठन किया गया।

ट्रैप टीम ने बिछाया जाल

पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार टीम ने जाल बिछाया और जैसे ही आरोपी अधिकारी ने परिवादी से 40 हजार रुपये रिश्वत की राशि स्वीकार की, निगरानी टीम ने उन्हें मौके पर ही दबोच लिया।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है। इसके पश्चात उन्हें माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी, पटना में प्रस्तुत किया जाएगा। मामले में आगे की जांच जारी है।

दूसरी कार्रवाई: नवादा में ग्रामीण आवास सहायक 10 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार

उसी दिन निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने नवादा जिले में भी एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बीरू कुमार चौधरी, ग्रामीण आवास सहायक, मेसकौर प्रखंड को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।

यह कार्रवाई निगरानी थाना कांड संख्या-067/26, दिनांक 02 जून 2026 के तहत की गई। आरोपी को मेसकौर प्रखंड कार्यालय के सामने मुख्य सड़क किनारे रिश्वत लेते समय रंगे हाथ पकड़ा गया।

इंदिरा आवास की तीसरी किस्त के नाम पर मांगी जा रही थी रिश्वत

परिवादी धनंजय कुमार ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उन्हें इंदिरा आवास योजना की तीसरी किस्त प्राप्त करनी थी।

आरोप है कि ग्रामीण आवास सहायक बीरू कुमार चौधरी द्वारा निर्माणाधीन मकान का फोटो खींचकर ऑनलाइन अपलोड करने तथा तीसरी किस्त पास कराने के एवज में 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की जा रही थी।

निगरानी जांच में सामने आई सच्चाई

शिकायत मिलने के बाद निगरानी ब्यूरो ने मामले का गोपनीय सत्यापन कराया। जांच में पाया गया कि आरोपी द्वारा वास्तव में रिश्वत की मांग की जा रही थी।

इसके बाद मामला दर्ज कर पुलिस उपाधीक्षक मिथिलेश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष ट्रैप टीम का गठन किया गया।

सड़क किनारे रिश्वत लेते ही दबोचा गया आरोपी

पूर्व निर्धारित रणनीति के तहत टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को मेसकौर प्रखंड कार्यालय के सामने मुख्य सड़क पर रिश्वत लेते समय रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है तथा उसे भी विशेष निगरानी न्यायालय में पेश किया जाएगा। मामले की आगे जांच जारी है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी ब्यूरो की लगातार कार्रवाई

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के विरुद्ध यह 67वीं और 68वीं प्राथमिकी दर्ज की गई है।

ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार:

वर्ष 2026 में अब तक कुल 68 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं।

इनमें ट्रैप (रंगे हाथ गिरफ्तारी) से जुड़े 62वें और 63वें मामले शामिल हैं।

अब तक कुल 62 आरोपियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया जा चुका है।

वर्ष 2026 में अब तक कुल 24,97,800 रुपये रिश्वत राशि बरामद की गई है।

वर्ष 2025 की तुलना में भी जारी है सख्त अभियान

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2025 में कुल 101 ट्रैप मामले दर्ज किए गए थे।

पिछले वर्ष की कार्रवाई में:

कुल 101 ट्रैप कांड दर्ज हुए थे।

रिश्वत की कुल बरामद राशि 37,80,300 रुपये रही थी।

बड़ी संख्या में सरकारी कर्मियों और अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी।

वर्तमान वर्ष 2026 में भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियान लगातार जारी है और ब्यूरो द्वारा सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है ।

निष्कर्ष

पटना और नवादा में हुई इन दो बड़ी कार्रवाइयों ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सरकारी सेवाओं के बदले रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की पैनी नजर बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के क्षेत्रीय अपर निदेशक और ग्रामीण आवास सहायक की गिरफ्तारी से स्पष्ट है कि शिकायत मिलने पर ब्यूरो त्वरित सत्यापन कर कानूनी कार्रवाई कर रहा है। आने वाले दिनों में भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसे अभियान और तेज होने की संभावना है।

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