BPSC अधिकारी के ‘कुत्ते भौंके हजार’ बयान पर CM सम्राट का एक्शन, परीक्षा नियंत्रक को निलंबित करने का आदेश
एम ए न्यूज डेस्क नीरज कुमार के रिपोर्ट पटना से।

पटना। बिहार लोक सेवा आयोग यानी BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह का शिक्षक अभ्यर्थियों को लेकर दिया गया विवादित बयान सामने आने के बाद बिहार की सियासत से लेकर प्रशासनिक महकमे तक हलचल तेज हो गई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान परीक्षा नियंत्रक द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार’ वाले बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद छात्रों और अभ्यर्थियों में नाराजगी देखने को मिली। मामले ने तूल पकड़ा तो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इसका संज्ञान लिया और सामान्य प्रशासन विभाग को संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए निलंबन का निर्देश दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में परीक्षा नियंत्रक ने कही थी ये बात
दरअसल, शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 और 70वीं BPSC परीक्षा से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पटना के गर्दनीबाग में आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया, नेगेटिव मार्किंग और चयन प्रक्रिया को लेकर कई मांगें उठाई जा रही हैं।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में नेगेटिव मार्किंग को पूरी तरह समाप्त करना और चयन प्रक्रिया को एक ही चरण में पूरा करना शामिल है। इसी बीच सोमवार को BPSC कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें आयोग की ओर से परीक्षा से जुड़े मुद्दों और अभ्यर्थियों की मांगों पर अपना पक्ष रखा गया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने परीक्षा प्रक्रिया, अभ्यर्थियों की शिकायतों और कथित अनियमितताओं से जुड़े सवाल पूछे। इसी दौरान परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने कहा कि यदि किसी उम्मीदवार को अपनी शिकायत या आरोपों में सच्चाई नजर आती है तो वह संबंधित साक्ष्यों के साथ अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
इसी क्रम में उन्होंने एक कहावत का इस्तेमाल किया—‘हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार।’ उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही विवाद खड़ा हो गया।
बयान वायरल होते ही अभ्यर्थियों में बढ़ा आक्रोश
वीडियो वायरल होने के बाद आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों की ओर से परीक्षा नियंत्रक के बयान पर आपत्ति जताई गई। छात्रों का आरोप है कि अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे अभ्यर्थियों के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है।
सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। देखते ही देखते मामला केवल छात्रों के आंदोलन तक सीमित नहीं रहा और राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा शुरू हो गई।
अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाना उनका अधिकार है और उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। ऐसे में आयोग के वरिष्ठ अधिकारी की ओर से कही गई उक्त बात ने विवाद को और बढ़ा दिया।
विवाद बढ़ने के बाद परीक्षा नियंत्रक ने दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने अपने बयान को लेकर सफाई दी और खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा इस्तेमाल की गई बात एक सामान्य कहावत थी और उसे किसी व्यक्ति या अभ्यर्थियों के समूह को अपमानित करने के उद्देश्य से नहीं कहा गया था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी परीक्षार्थी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। यदि उनके बयान से किसी को दुख पहुंचा है तो उन्होंने इसके लिए खेद जताया।
हालांकि, सफाई सामने आने के बावजूद मामला शांत नहीं हुआ और राजनीतिक प्रतिक्रिया लगातार सामने आती रही।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लिया संज्ञान
विवादित बयान को लेकर मामला मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तक पहुंचा। मुख्यमंत्री ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए सामान्य प्रशासन विभाग को संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह के निलंबन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हो गई है। सरकार के इस रुख को मामले में सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है।
इस घटनाक्रम के बाद BPSC की कार्यप्रणाली और अभ्यर्थियों से संवाद के तरीके को लेकर भी बहस तेज हो गई है। परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी के सार्वजनिक बयान को लेकर सरकार की ओर से इतनी तेजी से कार्रवाई किया जाना भी चर्चा का विषय बन गया है।
तेजस्वी यादव ने भी सरकार और BPSC पर साधा निशाना
मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी सरकार और BPSC पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसी शिकायतों को लेकर आवाज उठाने वाले अभ्यर्थियों के प्रति इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से सुनने के बजाय उनके प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था के वरिष्ठ अधिकारी से ऐसी भाषा की उम्मीद नहीं की जाती।
उन्होंने इस मामले में माफी की मांग भी की और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
अब आगे क्या होगा?
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ आगे प्रशासनिक कार्रवाई किस स्तर तक जाती है और BPSC की परीक्षा प्रक्रिया को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की मांगों पर सरकार और आयोग का अगला कदम क्या होगा।
TRE-4 और 70वीं BPSC परीक्षा को लेकर पहले से ही अभ्यर्थियों के बीच कई मुद्दों पर असंतोष है। ऐसे में परीक्षा नियंत्रक के बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। अब मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सरकार की कार्रवाई पर अभ्यर्थियों और राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।
फिलहाल, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही गई एक कहावत से शुरू हुआ विवाद मुख्यमंत्री के संज्ञान और निलंबन के निर्देश तक पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में यह मामला बिहार की प्रतियोगी परीक्षाओं, अभ्यर्थियों की मांगों और BPSC की कार्यप्रणाली को लेकर बड़ी राजनीतिक बहस का रूप ले सकता है।



