पटना में छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज
एम ए न्यूज डेस्क नीरज कुमार के रिपोर्ट पटना से।

पटना: राजधानी पटना बुधवार को छात्रों के प्रदर्शन के कारण राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बन गई। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के दौरान हुए कथित पुलिस लाठीचार्ज के विरोध और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं गांधी मैदान गेट संख्या-10 पर जुटे। यहां से राजभवन मार्च निकाला जाना था, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले तथा वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
गांधी मैदान गेट संख्या-10 पर बढ़ा तनाव
सुबह से ही पटना विश्वविद्यालय सहित राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और छात्र संगठनों के प्रतिनिधि गांधी मैदान पहुंचने लगे थे। छात्र अपने हाथों में बैनर और तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर पेपर लीक, शिक्षा में भ्रष्टाचार, फीस वृद्धि, निजीकरण और बेरोजगारी के खिलाफ नारे लिखे थे।

दोपहर करीब 12 बजे राजभवन मार्च प्रस्तावित था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जो बाद में झड़प में बदल गई।
पुलिस ने किया लाठीचार्ज, छोड़े आंसू गैस के गोले
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी उकसावे के बल प्रयोग किया। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

घटना के बाद कई छात्र घायल होने का दावा कर रहे हैं। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कई छात्र-छात्राएं इधर-उधर भागते नजर आए।
घायल छात्र का आरोप
एक घायल छात्र ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसे निशाना बनाकर पीटा।

«”नेमप्लेट हटाकर मुझे टारगेट करके मारा गया। मेरी पीठ पर लाठी के निशान हैं। दो पुलिसवालों ने मेरी पिटाई की है।”»
छात्राओं ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
प्रदर्शन में शामिल एक छात्रा ने कहा कि पुलिस छात्रों को रस्सियों से रोकने की कोशिश कर रही थी।

«”पुलिस बैरिकेड लगा रही है और रस्सी से छात्रों को बांध रही है। हम नहीं चाहते कि किसी भी छात्र को नुकसान पहुंचे। हम शांतिपूर्ण तरीके से राजभवन मार्च करना चाहते हैं। हमारी मांग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पेपर लीक के खिलाफ कार्रवाई की है।”»
छात्रों का आरोप- सरकार शिक्षा के मुद्दे पर गंभीर नहीं
सहरसा से आए एक छात्र ने कहा कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।

«”केंद्र सरकार और बिहार सरकार छात्रों पर लाठियां बरसा रही हैं। हम राजभवन का घेराव करेंगे और अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।”»
एक अन्य छात्रा ने कहा,
«”शिक्षा व्यवस्था में जो भी खामियां हैं उन्हें दूर करने की हमारी मांग है। हमें आगे बढ़ने नहीं दिया जा रहा है और पुलिस ने हम पर लाठीचार्ज किया है।”»
जंतर-मंतर घटना के विरोध में प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा,
«”जंतर-मंतर में छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ और बिहार में शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। इन्हीं मुद्दों को लेकर सभी छात्र एकजुट हुए हैं। देश में बर्बर सरकार नहीं चलेगी।”»
आइसा का आरोप- लोकतंत्र पर हमला
आइसा से जुड़े एक छात्र नेता ने कहा,
«”18-19 साल के छात्र लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने आए थे। लगातार पुलिस द्वारा बर्बर हमला किया गया। दिल्ली के बाद अब पटना में भी छात्रों की आवाज दबाई जा रही है।”»
छात्र नेता सबा आफरीन ने रखीं प्रमुख मांगें
छात्र नेता सबा आफरीन ने कहा कि यह आंदोलन केवल दिल्ली की घटना के विरोध तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आयोजित किया गया है।

उन्होंने कहा कि छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कई महत्वपूर्ण मांगें सरकार के सामने रखी

– केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
– बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का इस्तीफा।
– सभी पेपर लीक मामलों की फास्ट ट्रैक जांच।
– 7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
– सभी विद्यार्थियों को समान डिग्री व्यवस्था मिले।
– यूजी, पीजी और पीएचडी की बढ़ी हुई फीस वापस ली जाए।
– सभी विश्वविद्यालयों में नॉन-नेट फेलोशिप लागू की जाए।
– शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
– परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार खत्म किया जाए।
– विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता सुनिश्चित की जाए।
भारी पुलिस बल रहा तैनात
प्रशासन ने प्रदर्शन को देखते हुए गांधी मैदान और आसपास के इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की थी। बैरिकेडिंग कर राजभवन जाने वाले मार्गों को सील कर दिया गया था। पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने का प्रयास करती रही।
राजनीतिक हलकों में भी बढ़ी हलचल
पटना में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने घटना की निंदा करते हुए पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो राज्यव्यापी आंदोलन और तेज किया जाएगा।
फिलहाल स्थिति
लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल के बाद कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण रही। बाद में पुलिस ने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी। प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। हालांकि छात्र संगठनों ने साफ किया है कि उनका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनका विरोध आगे भी जारी रहेगा।



